Anil Ambani की बढ़ी मुश्किलें, ED ने RCom और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट

Edited By Updated: 10 Aug, 2026 10:45 AM

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उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़तती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी दो कंपनियों रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। मामले में समूह के पूर्व सीनियर अधिकारी गौतम दोषी, सतीश सेठ और...

नई दिल्लीः उद्योगपति अनिल अंबानी की मुश्किलें लगातार बढ़तती जा रही है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनकी दो कंपनियों रिलायंस कम्युनिकेशंस और रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। मामले में समूह के पूर्व सीनियर अधिकारी गौतम दोषी, सतीश सेठ और अमिताभ झुनझुनवाला को भी आरोपी बनाया गया है। उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के बैंक फंड के गबन का आरोप है।

ED ने आरकॉम के खिलाफ अपनी चार्जशीट में कहा है कि कंपनी को अपराध से हुई कमाई का हिसाब 40,186 करोड़ रुपए लगाया गया है। यह राशि बैंकों और वित्तीय संस्थानों के कंसोर्टियम को कंपनियों द्वारा नहीं चुकाई गई बकाया रकम से जुड़ी है। 

FCCB फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल

चार्जशीट में ED ने आरोप लगाया है कि कंपनी के अधिकारियों की फंड जुटाने, उसका इस्तेमाल करने, छिपाने और दिखाने में भी अहम भूमिका थी। जांच में फॉरेन करेंसी कन्वर्टिबल बॉन्ड (FCCB) से मिली 1 बिलियन डॉलर की राशि के अंतिम इस्तेमाल का गलत सर्टिफिकेशन भी शामिल है।

8,078 करोड़ की संपत्ति जब्त करने की मांग 

एक रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने मामले में पहले अटैच की गई 8,078 करोड़ रुपए की संपत्ति को जब्त करने की मांग की। इनमें रिलायंस कम्युनिकेशंस, उसके प्रमोटरों और डायरेक्टरों से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं। इनमें अनिल अंबानी की संपत्ति भी शामिल है।

टोल-रोड प्रोजेक्ट्स के फंड में हेराफेरी का आरोप

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ चार्जशीट में ED ने आरोप लगाया है कि NHAI द्वारा दिए गए चार टोल-रोड प्रोजेक्ट्स से पब्लिक फंड को दूसरी जगह लगाने की एक सुनियोजित योजना थी। इनमें त्रिची-करू, त्रिची-डिंडीगुल, सलेम-उलुंदुरपेट और जयपुर-रींगस प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन प्रोजेक्ट्स को NHAI अनुदान और बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों से मिले लोन के जरिए फाइनेंस किया गया था। 

ED के अनुसार, सितंबर-अक्टूबर 2010 के दौरान लगभग 187 करोड़ रुपए फर्जी सब-कॉन्ट्रैक्टिंग काम के नाम पर निकाल लिए गए।

कैसे की हेराफेरी?

डांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में ऐसे दस्तावेज बनाए गए जिनसे इन ट्रांसफर को असली प्रोजेक्ट खर्च के तौर पर दिखाया जा सके, जबकि फंड को शेल कंपनियों और हीरा व्यापारियों के जरिए घुमाया गया। आरकॉम के बारे में कहा कि मंजूर किए गए अंतिम इस्तेमाल के बजाय, घरेलू देनदारियों को चुकाने और घुमाने के लिए धोखाधड़ी से नई क्रेडिट सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया।
 
 

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