Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Aug, 2026 12:34 PM

एक दशक पहले तक भारी कर्ज व घाटे से जूझ रहे भारत के सरकारी बैंक (PSB) आज मजबूत बैलेंस शीट, घटते NPA और शानदार मुनाफे के दम पर ये बैंक मजबूती से खड़े हैं। अब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक नई रिपोर्ट ने इन बैंकों को मिलाकर बड़े और...
नई दिल्लीः एक दशक पहले तक भारी कर्ज व घाटे से जूझ रहे भारत के सरकारी बैंक (PSB) आज मजबूत बैलेंस शीट, घटते NPA और शानदार मुनाफे के दम पर ये बैंक मजबूती से खड़े हैं। अब प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) की एक नई रिपोर्ट ने इन बैंकों को मिलाकर बड़े और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंक बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।
बड़े बैंकों की जरूरत क्यों?
भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी और टेक्नोलॉजी में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है। ऐसे प्रोजेक्ट्स के लिए ज्यादा पूंजी और जोखिम उठाने की क्षमता वाले बैंकों की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक, संपत्ति के लिहाज से SBI दुनिया के सबसे बड़े बैंकों की तुलना में काफी पीछे है। SBI अभी 43वें नंबर पर आता है। पिछले साल के आंकड़ों में SBI की संपत्ति करीब 846 अरब डॉलर थी, जबकि दुनिया के 10वें सबसे बड़े बैंक की संपत्ति 2.6 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा थी।
सिर्फ विलय से नहीं बनेगा मजबूत बैंक
बैंकों का विलय कोई नई बात नहीं है। 2017 से 2020 के बीच सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटाकर 12 की गई थी। हालांकिस उस दौर में कमजोर बैंकों को मजबूत करना था। EAC-PM की रिपोर्ट बताती है कि केवल बैंकों का आकार बढ़ाने से ही वो सफल नहीं हो जाते। वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार, केवल सात बैंक ही पैमाने के हिसाब से पूरी तरह से कुशल पाए गए हैं। बड़े विलय के दौरान टेक्नोलॉजी सिस्टम, कर्मचारियों के ढांचे और कॉरपोरेट कल्चर को एकीकृत करना बड़ी चुनौती हो सकती है। इसके साथ मजबूत गवर्नेंस भी जरूरी होगी।
फिलहाल विलय की कोई सरकारी योजना नहीं
EAC-PM की सिफारिश के बावजूद अभी सरकार की ओर से PSB के विलय का कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं है। कुछ महीने पहले लोकसभा में भी सरकार ने स्पष्ट किया था कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
इसके बावजूद यह बहस अहम है। दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, बैंक क्रेडिट में सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी 54.4% थी। ऐसे में PSB को और मजबूत करने के साथ विदेशी निवेश सीमा को 20% से बढ़ाकर 49% करने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा हो रही है।