डिजिटल करंसी से सोने और शिपिंग तकः ट्रंप ने ईरान पर चौतरफा आर्थिक शिकंजा कसा, भारत का अरबों का कारोबार भी होगा प्रभावित

Edited By Updated: 25 Aug, 2026 04:42 PM

us sanctions on iran  unveiled new measures to tighten economic pressure

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नया व्यापक आर्थिक अभियान शुरू करते हुए करीब 60 लोगों, कंपनियों और जहाजों पर प्रतिबंध लगाए हैं। डिजिटल एसेट, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग भी निशाने पर हैं। भारत को चावल, चाय और दवाओं के निर्यात, भुगतान और शिपिंग में नई...

Washington: अमेरिका ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव का नया मोर्चा खोल दिया है और इसका असर अब भारत तक पहुंचने की आशंका है।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने ईरान की अर्थव्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने के लिए प्रतिबंधों का नया और व्यापक अभियान शुरू किया है।ट्रंप प्रशासन ने करीब 60 लोगों, कंपनियों और जहाजों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं और ईरान से कारोबार करने वाले विदेशी संस्थानों को भी चेतावनी दी है। सबसे बड़ी चिंता भारत के लिए है, क्योंकि अमेरिकी दबाव और दुबई के रास्ते कारोबार में आई रुकावट से भारतीय चावल, चाय और दवा निर्यात प्रभावित हो सकता है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने इसे ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ नाम दिया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य ईरान की आर्थिक गतिविधियों और उससे जुड़े विदेशी नेटवर्क पर इतना दबाव बनाना है कि तेहरान के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और वित्तीय लेन-देन करना मुश्किल हो जाए।

 

अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने इसे अभूतपूर्व अभियान बताया है। वॉशिंगटन ने साफ संकेत दिया है कि जो देश और कंपनियां ईरान के साथ कारोबार जारी रखेंगी, उनके खिलाफ भी आगे सेकेंडरी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। अमेरिका ने नए पैकेज के तहत करीब 60 व्यक्तियों, संस्थाओं और जहाजों को प्रतिबंधों के दायरे में लिया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इनमें कुछ ऐसे नेटवर्क शामिल हैं जिन पर ईरान के मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों के लिए सामान उपलब्ध कराने, साइबर गतिविधियों तथा तेल के निर्यात और उससे होने वाली कमाई को स्थानांतरित करने में मदद करने का आरोप है। लेकिन इस बार निशाना सिर्फ ईरान के अंदर मौजूद संस्थाएं नहीं हैं। अमेरिका विदेशी कंपनियों और बिचौलियों पर भी दबाव बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।

 

नए अभियान में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने ईरानी अर्थव्यवस्था से जुड़े पांच महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया है। डिजिटल एसेट्स, टेक्नोलॉजी, सोना, विमानन और शिपिंग अब प्रतिबंधों के संभावित दायरे में और ज्यादा मजबूती से शामिल हैं। अमेरिका का आरोप है कि ईरान डिजिटल एसेट्स का इस्तेमाल धन के लेन-देन और प्रतिबंधों से बचने के लिए करता है। सोने का इस्तेमाल वह अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए करता है, जबकि विमानन और समुद्री नेटवर्क के जरिए उपकरण, पैसा और तेल स्थानांतरित किए जाते हैं। अमेरिका के नए प्रतिबंधों का सीधा असर भारत के ईरान को होने वाले निर्यात पर पड़ने की आशंका है। रॉयटर्स के मुताबिक, भारत लंबे समय से ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार 2018-19 के करीब 17 अरब डॉलर के स्तर से 90 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है।

 

अब भारत से ईरान को मुख्य रूप से मानवीय आधार पर छूट प्राप्त वस्तुओं का निर्यात होता है। इनमें खास तौर पर चावल, चाय और दवाएं शामिल हैं।भारतीय निर्यातकों को डर है कि अमेरिका की नई पाबंदियां और ईरान के साथ वित्तीय लेन-देन में बढ़ती मुश्किलें इस कारोबार को और कमजोर कर सकती हैं।  भारत के लिए परेशानी सिर्फ अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह से नहीं है। ईरान को भारतीय सामान का एक बड़ा हिस्सा पारंपरिक रूप से दुबई के रास्ते भेजा जाता रहा है। लेकिन संयुक्त अरब अमीरात द्वारा ईरान के साथ कुछ व्यापारिक और वित्तीय गतिविधियों को रोकने से यह रास्ता भी प्रभावित हुआ है। रॉयटर्स के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में भारत ने ईरान को करीब 383 मिलियन डॉलर का चावल और 14 मिलियन डॉलर की चाय निर्यात की थी।

 

नए प्रतिबंधों और दुबई के रास्ते में रुकावट से खासकर भारतीय बासमती चावल कारोबार पर दबाव बढ़ने की आशंका है। दवाओं का निर्यात भी चिंता का विषय है। मानवीय वस्तुओं को आम तौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों में कुछ छूट मिलती है, लेकिन बैंकिंग, बीमा, भुगतान और शिपिंग में आने वाली अतिरिक्त अड़चनें भारतीय कंपनियों की लागत बढ़ा सकती हैं। भारतीय निर्यातकों को अब वैकल्पिक रास्तों और भुगतान व्यवस्था पर विचार करना पड़ रहा है। रॉयटर्स के अनुसार, कुछ निर्यातक तुर्किये के रास्ते जैसे विकल्प तलाश रहे हैं। अमेरिकी अभियान का सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान की तेल से होने वाली कमाई है। चीन लंबे समय से ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार रहा है। अमेरिका पहले भी चीन तक ईरानी तेल पहुंचाने वाले जहाजों, रिफाइनरियों और बिचौलियों पर प्रतिबंध लगाता रहा है।

 

हालिया अमेरिकी कदमों में चीन के बड़े वित्तीय संस्थानों को सीधे निशाना बनाने से फिलहाल परहेज किया गया है, लेकिन वॉशिंगटन का संदेश साफ है कि ईरान के साथ कारोबार करने वालों के लिए जोखिम बढ़ सकता है। ईरान पर यह नया आर्थिक दबाव ऐसे समय आया है जब देश पहले से ही लंबे सैन्य संघर्ष और व्यापारिक रुकावटों का सामना कर रहा है। तेल निर्यात में गिरावट, विदेशी व्यापार में मुश्किल, महंगाई और मुद्रा की कमजोरी ने आम ईरानियों पर भी असर डाला है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात में भारी गिरावट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को भी चिंता में डाल दिया है।

 

ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की धमकी
अमेरिकी प्रतिबंधों के जवाब में ईरान ने कड़ा रुख अपनाया है। तेहरान ने नए प्रतिबंधों की आलोचना करते हुए कहा है कि वह अपने हितों को नुकसान पहुंचाने वाले कदमों का जवाब देने का अधिकार रखता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यदि ईरान जवाब में तेल निर्यात या होर्मुज के रास्ते समुद्री यातायात को और बाधित करता है, तो इसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। इससे कच्चे तेल की कीमत, शिपिंग लागत और भारत समेत दुनिया भर में ऊर्जा आयात प्रभावित हो सकता है।

 

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