Edited By jyoti choudhary,Updated: 07 Aug, 2026 04:09 PM

बीमा दावों के निपटारे में होने वाली देरी पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने दावा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और ग्राहक हितैषी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत यदि कोई बीमा कंपनी तय समय सीमा में...
नई दिल्लीः बीमा दावों के निपटारे में होने वाली देरी पर केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सरकार ने दावा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और ग्राहक हितैषी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत यदि कोई बीमा कंपनी तय समय सीमा में क्लेम का भुगतान नहीं करती है, तो उसे बैंक दर से दो प्रतिशत अधिक ब्याज के साथ राशि का भुगतान करना होगा।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार, बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) के साथ मिलकर बीमा दावों के निस्तारण की लगातार निगरानी कर रही है। इसके लिए बीमा भरोसा पोर्टल समेत अन्य माध्यमों से ग्राहकों की शिकायतों और क्लेम से जुड़े मामलों पर नजर रखी जा रही है।
सरकार ने दावा खारिज करने की प्रक्रिया को भी अधिक पारदर्शी बनाया है। अब किसी बीमा दावे को अस्वीकार करने से पहले संबंधित समिति की मंजूरी लेना अनिवार्य होगा, ताकि मनमाने ढंग से क्लेम खारिज न किए जा सकें।
ग्राहकों के हित में प्रमुख बदलाव
पारदर्शी क्लेम प्रक्रिया
बीमा कंपनियों को अपनी पॉलिसी में क्लेम की पूरी प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की सूची स्पष्ट रूप से बतानी होगी।
आसान क्लेम पंजीकरण
ग्राहक ऑनलाइन पोर्टल, कॉल सेंटर या अन्य अधिकृत माध्यमों से आसानी से दावा दर्ज करा सकेंगे। इस प्रक्रिया में बीमा कंपनियों को पूरा सहयोग देना होगा।
देरी पर अतिरिक्त ब्याज
तय समय में भुगतान नहीं होने पर कंपनियों को बैंक दर से दो प्रतिशत अधिक ब्याज जोड़कर क्लेम राशि का भुगतान करना होगा।
तेज और निष्पक्ष निपटारा
बीमा कंपनियों को दावों का शीघ्र और निष्पक्ष निस्तारण सुनिश्चित करना होगा। इसके लिए नियमित निगरानी के साथ कंपनी के शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की गई है।
सरकार का मानना है कि इन बदलावों से बीमाधारकों के अधिकार मजबूत होंगे, दावा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहकों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।