Edited By Pardeep,Updated: 22 Sep, 2026 10:03 PM

देश में चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और चीनी उद्योग द्वारा मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ाने की मांग के बीच केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान सामने आया है।
नई दिल्ली: देश में चीनी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और चीनी उद्योग द्वारा मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ाने की मांग के बीच केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान सामने आया है। राष्ट्रीय सहकारी चीनी कारखाना महासंघ लिमिटेड (NFCSF) के एक कार्यक्रम में शामिल हुए गडकरी ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार चीनी या अन्य कृषि उत्पादों के दाम तय नहीं कर सकती।
वैश्विक बाजार तय करता है दरें
गडकरी ने कहा कि वर्तमान में हम एक वैश्विक अर्थव्यवस्था में हैं, जहां चाहकर भी कोई सरकार कृषि उत्पादों की कीमतें निर्धारित नहीं कर सकती। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि चीनी के दाम ब्राजील, मक्के के दाम अमेरिका और पाम ऑयल की कीमतें मलेशिया में तय होती हैं। राजनीतिक बयानबाजी पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहते हुए किसानों के लिए ऐसी मांगों को उठाना आसान होता है, लेकिन सत्ता में रहने पर इन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करने में कठिनाइयां आती हैं।
ब्राजील बनाम भारत: उत्पादन लागत में भारी अंतर
वैश्विक बाजार का गणित समझाते हुए उन्होंने बताया कि ब्राजील में 2,000 से 3,000 एकड़ के बड़े फार्म हैं और वहां आधुनिक मशीनों का इस्तेमाल होता है। इस वजह से ब्राजील में चीनी बनाने की लागत महज 23 रुपये प्रति किलो आती है, जबकि भारत में यह लागत 33 से 34 रुपये प्रति किलो पड़ती है। ब्राजील में अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध होते ही भारत में कीमतें अपने आप गिर जाती हैं।
केवल चीनी पर निर्भर न रहें किसान
केंद्रीय मंत्री ने चीनी उद्योग और किसानों को केवल चीनी बिक्री पर निर्भर न रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि अपनी आमदनी बढ़ाने के लिए गन्ने के अन्य सह-उत्पादों (By-products) का इस्तेमाल करना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने गन्ने के कचरे, बायोमास आधारित उत्पादों और जैविक खाद के उत्पादन पर ध्यान देने को कहा, जिससे चीनी मिलों और किसानों दोनों को अतिरिक्त आय मिल सके।