Edited By Niyati Bhandari,Updated: 22 Sep, 2026 12:00 AM

Kalki and Hrishikesh Dwadashi 2026: भाद्रपद शुक्ल द्वादशी 2026 पर बन रहा है दुर्लभ महासंयोग। जानें, भगवान कल्कि और हृषिकेश पूजन की सटीक विधि, शुभ समय, गेहूं दान मंत्र और धार्मिक महत्व।
Kalki and Hrishikesh Dwadashi 2026: सनातन धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि का विशेष अलौकिक महत्व माना गया है। यह पावन तिथि भगवान श्रीहरि विष्णु के आगामी 'कल्कि अवतार' और उनके समस्त इंद्रियों के स्वामी 'हृषिकेश' स्वरूप की साधना को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजन करने से साधक के समस्त पाप धुल जाते हैं और उसे विष्णुलोक की प्राप्ति होती है।
Kalki and Hrishikesh Dwadashi Shubh Muhurat 2026 कल्कि और हृषिकेश द्वादशी शुभ मुहूर्त और तिथि समय
पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में द्वादशी तिथि का प्रारंभ 22 सितंबर 2026 की रात्रि 09:43 बजे से होगा और समापन 23 सितंबर 2026 की रात्रि 10:50 पर होगा।
इस पावन तिथि का त्रि-आयामी महत्व
कल्कि द्वादशी का पर्व कलियुग के अंत में प्रकट होने वाले भगवान विष्णु के 10वें अवतार कल्कि के स्मरण में मनाया जाता है और हृषिकेश द्वादशी पर इंद्रियों के स्वामी भगवान हृषिकेश (विष्णु जी) की पूजा होती है। इस तिथि पर भगवान हृषिकेश की पूजा का वर्णन नारद एवं भविष्य पुराण में भी किया गया है।

कल्कि और हृषिकेश द्वादशी पर बनेगा महासंयोग: वैसे तो सप्तवार भगवान के बनाए हुए हैं और सभी का अपना-अपना महत्व सनातन पुराणों में वर्णित है। कल्कि और हृषिकेश द्वादशी जब बुधवार को आती है तो इस तिथि पर श्रवण नक्षत्र का योग बन जाता है। ऐसा होने से इस तिथि का पुण्य महापुण्य में परिवर्तित हो जाता है। विद्वानों का तो यहां तक कहना है की इस एक संयोग में व्रत करने से साल भर में पड़ने वाली सभी द्वादशी व्रतों का शुभ फल अनंत गुणा प्राप्त होता है।
कल्कि और हृषिकेश द्वादशी की पूजा विधि
द्वादशी के दिन व्रतधारी तांबे या मिट्टी के कलश में दूध भरकर भगवान हृषिकेश का अभिषेक करें और इस मंत्र का जाप करें-
मंत्र- हृषीकेश नमस्तुभ्यम्
मंत्र का जाप करते हुए शहद मिले चरु (चावल अथवा अन्न) से 108 आहुतियां दें। पूजा के बाद किसी सुयोग्य विद्वान या ब्राह्मण को 6 सेर (लगभग 5.5 किलोग्राम) गेहूं और अपनी शक्ति के अनुसार स्वर्ण, अगर सोने का दान न कर सकें तो द्रव्य दक्षिणा के रुप में दें।

गेहूं दान का विशेष प्रार्थना मंत्र
दान करते समय इस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए-
मंत्र: हृषीकेश नमस्तुभ्यं सर्वलौकेकहेतवे।
मह्यं सर्वसुखं देही गोधूमस्य प्रदानतः॥
मंत्र का अर्थ: "हे संपूर्ण लोकों के स्वामी भगवान हृषिकेश! आपको प्रणाम है। इस गेहूं के दान से प्रसन्न होकर मुझे जीवन के समस्त सुख प्रदान करें।"
कल्कि और हृषिकेश द्वादशी व्रत पारण विधि
दान देने के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं और स्वयं मौन रहकर प्रसाद ग्रहण करें। इस सरल अनुष्ठान से मनुष्य जन्म-मरण और पापों के चक्र से मुक्त होकर महायज्ञ के समान फल प्राप्त करता है।
