Edited By jyoti choudhary,Updated: 28 Jul, 2026 12:09 PM

वित्तीय मामलों से जुड़ी संसद की स्थायी समिति द्वारा हाल ही में सरकार को क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के लिए सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) बनाने की सिफारिश के बाद, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने नया गाइडेंस
बिजनेस डेस्कः वित्तीय मामलों से जुड़ी संसद की स्थायी समिति द्वारा हाल ही में सरकार को क्रिप्टोकरेंसी और अन्य वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) के लिए सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) बनाने की सिफारिश के बाद, सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने नया गाइडेंस नोट जारी किया है। इसके तहत क्रिप्टो एक्सचेंज, ब्रोकर और अन्य संबंधित इंटरमीडियरीज को अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाले लेनदेन की जानकारी आयकर विभाग को देनी होगी।
यह कदम ऑर्गनाइजेशन फॉर इकनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) द्वारा विकसित क्रिप्टो-एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क (CARF) के अनुरूप उठाया गया है। इसका उद्देश्य क्रिप्टो लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ाना और टैक्स से जुड़ी जानकारी का वैश्विक स्तर पर बेहतर आदान-प्रदान सुनिश्चित करना है।
नई व्यवस्था से टैक्स विभाग को निवेशकों के क्रिप्टो लेनदेन की सीधे एक्सचेंजों से जानकारी मिलेगी। इससे टैक्स रिटर्न में दी गई जानकारी और वास्तविक ट्रांजैक्शन का मिलान आसान होगा तथा एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) को अधिक सटीक तरीके से तैयार किया जा सकेगा।
हालांकि, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े टैक्स नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वर्चुअल डिजिटल एसेट्स से होने वाले लाभ पर पहले की तरह 30% की फ्लैट टैक्स दर लागू रहेगी। इसके अलावा, क्रिप्टो ट्रेडिंग में हुए नुकसान को किसी अन्य आय या लाभ से समायोजित (ऑफसेट) नहीं किया जा सकेगा और न ही इसे भविष्य के वर्षों के लिए कैरी फॉरवर्ड किया जा सकेगा। क्रिप्टोकरेंसी को भारत में अभी भी वैध मुद्रा (लीगल टेंडर) का दर्जा प्राप्त नहीं है।
नई गाइडलाइन के तहत रिपोर्टिंग क्रिप्टो-एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (RCASP) को ग्राहकों की KYC प्रक्रिया पूरी करनी होगी, उनकी टैक्स रेजिडेंसी की पुष्टि करनी होगी और हर वर्ष लेनदेन का विस्तृत विवरण आयकर विभाग को उपलब्ध कराना होगा।
Mudrex के CEO एडुल पटेल के अनुसार, CARF आधारित रिपोर्टिंग व्यवस्था भारत में क्रिप्टो एसेट्स को अधिक संगठित वित्तीय रिपोर्टिंग ढांचे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उनका मानना है कि इससे भविष्य में निवेशकों की सुरक्षा और नवाचार के बीच संतुलन बनाने वाली नीतियां तैयार करने में मदद मिलेगी।