Trump Tariff Refund: अमेरिका कर रहा टैरिफ रिफंड, लेकिन भारतीय निर्यातकों को सीधा फायदा नहीं

Edited By Updated: 22 Apr, 2026 12:06 PM

india s 12 billion share in 166 billion refunds but no direct benefit for

अमेरिका ने 20 अप्रैल से लिए गए जवाबी शुल्क की वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और भारतीय निर्यातकों को इसके लिए अमेरिकी खरीदारों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क करना चाहिए। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने मंगलवार को यह बात कही। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च...

बिजनेस डेस्कः अमेरिका ने 20 अप्रैल से लिए गए जवाबी शुल्क की वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी है और भारतीय निर्यातकों को इसके लिए अमेरिकी खरीदारों के साथ सक्रिय रूप से संपर्क करना चाहिए। आर्थिक शोध संस्थान जीटीआरआई ने मंगलवार को यह बात कही। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि यह संपर्क महत्वपूर्ण होगा क्योंकि शुल्क वापसी (रिफंड) की राशि केवल अमेरिकी आयातकों को जाती है और निर्यातकों को इस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं होता। 

भारत का $12 अरब हिस्सा

भारतीय निर्यातकों के पास इसके लिए का दावा करने का कोई सीधा कानूनी रास्ता नहीं होगा। रिपोर्ट में कहा गया कि 2 अप्रैल 2025 से लगाए गए अमेरिकी शुल्क ने कई भारतीय उत्पादों के निर्यात को प्रभावित किया। कुल शुल्क वापसी की राशि करीब 166 अरब डॉलर है, जिसमें से करीब 12 अरब डॉलर भारतीय वस्तुओं से संबंधित हैं। इसे प्राप्त करने के लिए अमेरिकी आयातकों को आयात आंकड़ा, शुल्क श्रेणियां और भुगतान के प्रमाण के साथ ऑनलाइन विस्तृत दावा दाखिल करना होगा। 

जवाबी शुल्क व्यवस्था दो अप्रैल 2025 को 10 प्रतिशत से शुरू हुई थी जिसे लगातार तेजी से बढ़ाया गया। भारत के लिए दरें सात अगस्त 2025 तक 25 प्रतिशत और 28 अगस्त तक 50 प्रतिशत तक पहुंच गईं और फरवरी 2026 की शुरुआत तक इसी स्तर पर बनी रहीं। अमेरिकी उच्चतम न्यायालय ने 20 फरवरी को दिए फैसले में ट्रंप के शुल्क के पूरे ढांचे को अमान्य कर दिया, जिससे ये शुल्क कानूनी रूप से शून्य हो गए और इसकी वापसी की प्रक्रिया शुरू हुई। भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात का लगभग 53 प्रतिशत हिस्सा इन उच्च शुल्कों से प्रभावित हुआ है। 

किन सेक्टर्स को कितनी राहत?

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, ''भारत से जुड़े अनुमानित 12 अरब अमेरिकी डॉलर में से, वस्त्र एवं परिधान का हिस्सा करीब चार अरब डॉलर, इंजीनियरिंग सामान का हिस्सा लगभग चार अरब डॉलर और रसायन का हिस्सा करीब दो अरब डॉलर हो सकता है जबकि अन्य क्षेत्रों का हिस्सा कम होगा।'' उन्होंने कहा कि भारतीय निर्यातकों को ये शुल्क स्वतः वापस नहीं मिलेगा और यह राशि केवल अमेरिकी आयातकों को जाती है इसलिए निर्यातकों का इस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है। 

श्रीवास्तव ने कहा, ''कोई भी शुल्क वापसी व्यावसायिक बातचीत पर निर्भर करेगी। इसके लिए भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी खरीदारों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना चाहिए, विशेषकर उन मामलों में जहां पहले के अनुबंध शुल्क भुगतान आधार पर तय किए गए थे।'' श्रीवास्तव ने कहा कि लाभ पाने के लिए भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी खरीदारों के साथ बातचीत करनी होगी और जहां पहले की कीमतों में शुल्क लागत शामिल थी, वहां वापस की गई राशि में हिस्सेदारी की मांग करनी चाहिए। 
 

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