Edited By jyoti choudhary,Updated: 16 Apr, 2026 11:37 AM

भारत की अर्थव्यवस्था भले ही दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है लेकिन इसके बावजूद ग्लोबल रैंकिंग में उसे झटका लगा है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2025 में एक पायदान फिसलकर छठे स्थान पर आ...
बिजनेस डेस्कः भारत की अर्थव्यवस्था भले ही दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है लेकिन इसके बावजूद ग्लोबल रैंकिंग में उसे झटका लगा है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत 2025 में एक पायदान फिसलकर छठे स्थान पर आ गया है, जबकि 2024 में वह पांचवें नंबर पर था।
IMF के अनुसार, 2025 में भारत की अर्थव्यवस्था का आकार करीब 3.92 ट्रिलियन डॉलर रहा। वहीं यूनाइटेड किंगडम लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर के साथ भारत से आगे निकल गया, जबकि जापान 4.44 ट्रिलियन डॉलर के साथ पहले से ही आगे बना हुआ है।
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रुपए की कमजोरी बनी बड़ी वजह
रैंकिंग डॉलर में तय होती है और यहीं भारत को नुकसान हुआ। 2024 में जहां डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 84.6 था, वहीं 2025 में यह गिरकर 88.5 तक पहुंच गया। यानी रुपये में जीडीपी बढ़ने के बावजूद डॉलर में उसकी वैल्यू उतनी नहीं बढ़ पाई।
भारत की जीडीपी रुपए में 2024 के करीब 318 ट्रिलियन रुपए से बढ़कर 2025 में 346.5 ट्रिलियन रुपए हो गई लेकिन रुपए की गिरावट ने इस बढ़त को डॉलर के लिहाज से कमजोर कर दिया।
इसे आसान भाषा में समझें तो—कमाई बढ़ी लेकिन डॉलर के मुकाबले कीमत गिरने से उसकी अंतरराष्ट्रीय वैल्यू उतनी नहीं बढ़ी।
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आगे फिर तेजी की उम्मीद
IMF का अनुमान है कि भारत 2026 तक छठे स्थान पर रह सकता है लेकिन इसके बाद वापसी तेज होगी। 2027 में भारत के यूनाइटेड किंगडम को पीछे छोड़कर चौथे स्थान पर आने और 2028 में जापान को पछाड़कर तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की संभावना है।
संशोधित अनुमान के मुताबिक 2031 तक भारत की अर्थव्यवस्था करीब 6.79 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है।