Edited By Niyati Bhandari,Updated: 23 Apr, 2026 09:50 AM

Guru Pushya Yog 2026: जानें साल 2026 में गुरु पुष्य योग कब है? इस शुभ संयोग से किन राशियों को मिलेगा बंपर धन लाभ और नौकरी में तरक्की। ऐश्वर्यवान जीवन के लिए इस विधि से करें पूजा।
Guru Pushya Yog 2026: ज्योतिष शास्त्र में सबसे शुभ माने जाने वाले गुरु पुष्य योग का महासंयोग साल 2026 में बनने जा रहा है। जब पुष्य नक्षत्र गुरुवार के दिन पड़ता है, तो उसे गुरु पुष्य योग कहा जाता है, जिसे बेहद पवित्र और स्थायी फल देने वाला नक्षत्र माना गया है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 में यह दुर्लभ संयोग 23 अप्रैल, 21 मई और 18 जून को बनने जा रहा है। इस अवधि में तीन विशेष राशियों की किस्मत चमकने वाली है और उनके जीवन में धन-धान्य की वर्षा होने के प्रबल संकेत हैं।

पुष्य नक्षत्र के दिन किए गए हर शुभ कार्य का परिणाम सौ गुणा हो जाता है, इसी तरह इस दिन किया गया दान अक्षत हो जाता है और इस दिन खरीदी गई वस्तुएं भी अक्षत रहेगी।
गुरु पुष्य योग होने के कारण श्रीलक्ष्मी-नारायण का पूजन श्रेष्ठ रहेगा। पुष्य नक्षत्र को तिष्य व अमरेज्य भी कहते हैं। अमरेज्य का अर्थ है, देवताओं द्वारा पूजित। बृहस्पति को अत्यधिक प्रिय शनि का नक्षत्र पुष्य नक्षत्रराज कहा जाता है। विवाह को छोड़कर इसमें किया गया कोई की कार्य स्वार्थ सफलता प्रदान करता है। इस योग में लक्ष्मी-नारायण के ऐसे चित्र का पूजन किया जाता है जिसमें क्षीर सागर के बीच शेषनाग की शय्या पर महादेवी लक्ष्मी नारायण की सेवा में लीन हों तथा विष्णु की नाभि से कमल उत्पन्न होकर ब्रह्मा का सृजन कर रहा है। नारायण अपने नीचे वाले बाएं हाथ में पद्म कमल, नीचे वाले दाएं हाथ में कौमोदकी गदा, ऊपर वाले बाएं हाथ में पाञ्चजन्य शंख व अपने ऊपर वाले दाएं हाथ में सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हों तथा नारायण ने कौस्तुभ मणि व शार्ङ्ग धारण किए हुए हैं। गुरु-पुष्य योग होने पर लक्ष्मी-नारायण का पूजन धन-धान्य की संपन्नता देता है, ऐश्वर्यवान जीवन प्रदान करता है व भाई-बहन के रिश्ते से कलह को खत्म करता है।

Guru Pushya Yoga Puja vidhi गुरु पुष्य योग पूजा विधि: भगवान लक्ष्मी-नारायण का उत्तरमुखी होकर विधिवत पूजन करें। पूजन में पीले वस्त्र व लाल आसान का प्रयोग करें। गौघृत में हल्दी मिलाकर दीप करें, सुगंधित धूप करें। केसर चढ़ाएं। गैंदा के फूल चढ़ाएं, बेसन से बने मिष्ठान का भोग लगाएं। तुलसी पत्र चढ़ाएं तथा चंदन की माला से इस विशेष मंत्र का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग प्रसाद रूप में वितरित करें।
Guru Pushya Yoga Puja mantra गुरु पुष्य योग पूजा मंत्र: श्रीं सत्यलोकपालकाय नमः॥

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धनु राशि: धनु राशि वालों के लिए यह योग किसी वरदान से कम नहीं है। इस राशि के स्वामी स्वयं देव गुरु बृहस्पति हैं। गुरु पुष्य मृत योग लंबे समय से अटके कामों को गति देगा। ऐसे-ऐसे साधनों से धन लाभ होगा, जो आपको हैरान कर देगा।
सिंह राशि: दिल में छिपी सभी मुरादें पूरी होने वाली हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा के साथ सरकारी नौकरी का योग है। प्रमोशन, सैलरी में बढ़ौतरी और मनचाहे स्थान पर तबादला होने के प्रबल संकेत हैं। बिजनेसमैन को अच्छा मुनाफा मिलेगा। समाज में रुतबा बढ़ेगा।
कर्क राशि: कर्क राशि वालों को इस योग से चौतरफा लाभ मिलेगा। इनकी चांदी ही चांदी रहेगी। पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है, जो चंद्रमा (कर्क राशि का स्वामी) से संबंधित है, इसलिए इन्हें आर्थिक, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिलने वाली है।
