Edited By Anu Malhotra,Updated: 13 Apr, 2026 08:31 AM

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर कोहराम मचा दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड, दोनों ने ही $100 प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया है। जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें 7% से...
नई दिल्ली: ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर कोहराम मचा दिया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी क्रूड, दोनों ने ही $100 प्रति बैरल का मनोवैज्ञानिक स्तर पार कर लिया है। जहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें 7% से 8% तक उछल गई हैं, वहीं भारतीय ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि देश में फिलहाल तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
क्यों आई क्रूड ऑयल में अचानक तेजी?
तेल की कीमतों में इस ताज़ा उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य और कूटनीतिक तनाव है:
- पाकिस्तान के इस्लामाबाद में दोनों देशों के बीच 21 घंटे तक चली शांति वार्ता बिना किसी ठोस नतीजे के खत्म हो गई।
- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी करने का बड़ा ऐलान किया है।
- यह नाकेबंदी आज भारतीय समयानुसार देर शाम से प्रभावी हो जाएगी, जिससे दुनिया भर में तेल की सप्लाई चेन बाधित होने का डर है।
भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम (13 अप्रैल, 2026)
भारी वैश्विक उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय महानगरों में आज कीमतें इस प्रकार हैं:
शहर पेट्रोल (प्रति लीटर) डीजल (प्रति लीटर)
दिल्ली ₹94.77 ₹87.67
मुंबई ₹103.54 ₹90.03
कोलकाता ₹105.45 ₹92.02
चेन्नई ₹100.80 ₹92.39
बेंगलुरु ₹102.92 ₹90.99
पोर्ट ब्लेयर ₹82.46 ₹78.05
आम आदमी को राहत देने के लिए सरकार का 'मास्टरस्ट्रोक'
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतें बढ़ने के बाद भी भारत में रेट न बढ़ने के पीछे सरकार की एक सोची-समझी रणनीति है:
एक्साइज ड्यूटी में भारी कटौती: सरकार ने हाल ही में पेट्रोल पर ₹10 प्रति लीटर की ड्यूटी कम की है। अब पेट्रोल पर ड्यूटी ₹13 से घटकर महज ₹3 रह गई है, जबकि डीजल पर इसे पूरी तरह (Zero) खत्म कर दिया गया है। इस कटौती का सीधा फायदा पंप पर रेट कम करके नहीं दिया गया, बल्कि इसका उपयोग IOCL और BPCL जैसी सरकारी तेल कंपनियों के घाटे (Under-recoveries) को कम करने के लिए किया जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह है कि अंतरराष्ट्रीय मार्केट की तेजी का असर आम आदमी की जेब पर न पड़े और देश में महंगाई नियंत्रण में रहे।