वाहन कलपुर्जों के निर्यात से आगे बढ़कर उन्नत प्रौद्योगिकी पर ध्यान दे भारत: हुंदै इंडिया एमडी

Edited By Updated: 02 Sep, 2026 05:44 PM

india should move beyond auto component exports and focus on advanced technology

वाहन विनिर्माता हुंदै मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) तरुण गर्ग ने बुधवार को कहा कि भारत को पारंपरिक वाहन कलपुर्जों से आगे बढ़कर उन्नत प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग क्षमता और नवाचार के निर्यात पर ध्यान देना चाहिए। गर्ग

नई दिल्लीः वाहन विनिर्माता हुंदै मोटर इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) तरुण गर्ग ने बुधवार को कहा कि भारत को पारंपरिक वाहन कलपुर्जों से आगे बढ़कर उन्नत प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग क्षमता और नवाचार के निर्यात पर ध्यान देना चाहिए। गर्ग ने भारतीय वाहन कलपुर्जा विनिर्माता संघ (एसीएमए) के 66वें वार्षिक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि देश को सेमीकंडक्टर चिप, इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) बैटरी सेल और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में घरेलू क्षमता विकसित करने के प्रयास तेज करने की जरूरत है। 

उन्होंने कहा, ''सरकार को ऐसा सतत दीर्घकालिक नीतिगत ढांचा उपलब्ध कराने की जरूरत है, जो बड़े पैमाने पर उत्पादन को समर्थन दे और प्रौद्योगिकियों एवं कलपुर्जों के विकास को गति दे।'' गर्ग ने कहा कि भारत ने वाहन उद्योग में बड़े पैमाने पर उत्पादन की क्षमता सफलतापूर्वक विकसित की है, लेकिन अब उसे भविष्य की प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास और विनिर्माण की घरेलू क्षमता बढ़ाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 24 अरब डॉलर के वाहन कलपुर्जों का निर्यात किया, जबकि आयात करीब 25.4 अरब डॉलर रहा। इससे 1.4 अरब डॉलर का व्यापार घाटा हुआ। 

गर्ग ने कहा कि चिंता केवल व्यापार घाटे को लेकर नहीं है। भारत का निर्यात अभी अपेक्षाकृत पुरानी प्रौद्योगिकियों पर केंद्रित है, जबकि आयात में उन्नत और अधिक मूल्य वाली प्रौद्योगिकियों की हिस्सेदारी अधिक है। उन्होंने वाहन कंपनियों से आपूर्तिकर्ताओं के साथ दीर्घकालिक प्रौद्योगिकी साझेदारी बढ़ाने तथा कलपुर्जा निर्माताओं से शोध एवं विकास, डिजाइन और बौद्धिक संपदा में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया। गर्ग ने सेमीकंडक्टर, दुर्लभ-मृदा चुंबक, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और बैटरी सेल जैसी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों में घरेलू क्षमता विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को अब 'मेक इन इंडिया' से आगे बढ़कर 'डिजाइन इन इंडिया, इंजीनियर इन इंडिया और क्रिएट इन इंडिया' पर ध्यान देना चाहिए। 

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