चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत: आरबीआई

Edited By Updated: 29 May, 2026 01:00 PM

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भारतीय अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद मजबूत बनी हुई है और मजबूत वृहद आर्थिक आधार चालू वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि को सहारा देंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह बात कही। रिपोर्ट के...

नई दिल्लीः भारतीय अर्थव्यवस्था चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद मजबूत बनी हुई है और मजबूत वृहद आर्थिक आधार चालू वित्त वर्ष 2026-27 में वृद्धि को सहारा देंगे। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शुक्रवार को अपनी वार्षिक रिपोर्ट में यह बात कही। रिपोर्ट के अनुसार, ऊंची ऊर्जा कीमतों, आपूर्ति शृंखला में बाधाओं और वैश्विक बाजारों से आने वाली चुनौतियों के बावजूद कंपनियों एवं बैंकिंग क्षेत्र के मजबूत बही-खाते तथा सरकार का पूंजीगत व्यय पर जोर भारत की मजबूत वृद्धि गति के लिए अनुकूल है। इसमें कहा गया है कि 2026 में भू-राजनीतिक जोखिम वैश्विक वृद्धि के लिए प्रमुख बाधा बनकर उभरा है। फरवरी 2026 के अंत में पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने का असर वैश्विक वृद्धि और मुद्रास्फीति के अनुमानों में दिख रहा है। 

रिपोर्ट में कहा गया है, ''मध्यम वैश्विक वृद्धि के परिदृश्य के बीच 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था का दृष्टिकोण सकारात्मक बना हुआ है। हालांकि पश्चिम एशिया में लंबा खिंचने वाला संघर्ष नकारात्मक जोखिम पैदा कर सकता है।'' इसमें कहा गया कि प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ विभिन्न व्यापार समझौतों का क्रियान्वयन भारत की वृद्धि को और गति देगा। भारत वित्त वर्ष 2025-26 में 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ते हुए प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश बना रहा, जबकि 2024-25 में यह वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत थी। यह मजबूत घरेलू मांग, निरंतर निवेश, सक्रिय नीतिगत पहल और ठोस व्यापक आर्थिक आधार से समर्थित रही। रिपोर्ट में कहा गया कि 2026-27 में कृषि क्षेत्र का परिदृश्य दक्षिण-पश्चिम मानसून की प्रगति एवं वितरण पर निर्भर करेगा। 

इसमें कहा गया, ''अल नीनो की संभावना कृषि उत्पादन के लिए नकारात्मक जोखिम उत्पन्न करती है। हालांकि मानसून के उत्तरार्ध में वर्षा बढ़ाने वाली सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुवीय स्थिति इसके प्रतिकूल प्रभाव को आंशिक रूप से कम कर सकती है।'' रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव प्रमुख कच्चे माल, विशेषकर उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव डाल सकते हैं। हालांकि सरकार द्वारा विविध स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित करने और भंडार (बफर) प्रबंधन के प्रयास इन चिंताओं को कम करने में मदद करेंगे। इसके अलावा, पर्याप्त खाद्यान्न भंडार, जलाशयों में पर्याप्त जल स्तर और स्थिर कृषि संभावनाओं से 2026-27 में मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य के अनुरूप रहने की संभावना है, भले ही अल नीनो की स्थिति और सामान्य से अधिक गर्मी हो। 

केंद्र सरकार ने आरबीआई के साथ परामर्श से एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 की अवधि के लिए दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ मुद्रास्फीति के लिए चार प्रतिशत का लक्ष्य बरकरार रखा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि आरबीआई केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (सीबीडीसी) के परीक्षणात्मक उपयोग का विस्तार करने की योजना बना रहा है, ताकि इसे डीबीटी योजनाओं और घरेलू खुदरा क्षेत्र में नए उपयोगों तक पहुंचाया जा सके। साथ ही, वित्तीय परिसंपत्तियों के 'टोकनाइजेशन' और अधिक प्रतिभागियों को शामिल करने के लिए अतिरिक्त परीक्षणात्मक परियोजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।  

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