Edited By Tanuja,Updated: 28 May, 2026 07:03 PM

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान में बच्चों को “गलत इतिहास” पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कई पाकिस्तानी अपने हिंदू पूर्वजों को स्वीकार नहीं करते और खुद को अरब या ईरानी मूल का बताते हैं। उनके बयान से पाकिस्तान...
International Desk: ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने पाकिस्तान की शिक्षा व्यवस्था और इतिहास लेखन पर बड़ा सवाल उठाते हुए कहा है कि देश के बच्चों को “गलत इतिहास” पढ़ाया जा रहा है। उनके बयान ने पाकिस्तान में पहचान, संस्कृति और ऐतिहासिक विरासत को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक इंटरव्यू में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान के कई लोग अपनी असली जड़ों को स्वीकार नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के आधे लोग यह दावा करते हैं कि उनके पूर्वज सऊदी अरब या ईरान से आए थे, जबकि वास्तविकता इससे अलग है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मेरे पूर्वज हिंदू थे। क्या इससे मैं कम पाकिस्तानी हो जाता हूं?”
"We removed Chandragupta Maurya & Ashoka from history books coz they were Hindus."
- Pak defense minister Khawaja Asifpic.twitter.com/jGU5IOPN4S
— Pakistan Untold (@pakistan_untold) May 26, 2026
ख्वाजा आसिफ ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की इतिहास की किताबों से कई महत्वपूर्ण भारतीय शासकों और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लगभग मिटा दिया गया। उन्होंने कहा कि चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक जैसे शासकों को इसलिए नजरअंदाज किया गया क्योंकि वे हिंदू थे। उनके मुताबिक, पाकिस्तान में ऐसी सोच तैयार की गई जिससे नई पीढ़ी अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान से दूर हो जाए। आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान में लंबे समय से एक ऐसी मानसिकता विकसित की गई जिसमें लोगों को अपने ही अतीत से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने कहा कि बच्चे तथ्यात्मक इतिहास नहीं पढ़ रहे और आज कई युवाओं को यह भी नहीं पता कि चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक कौन थे। यह बयान ऐसे समय आया है जब ख्वाजा आसिफ पहले से ही अमेरिका और इजरायल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा में हैं।
"My ancestors were Hindus."
- Pak defense minister Khawaja Asif pic.twitter.com/pWCzfwT6HA
— STORM FORCE (@chandnisin92496) May 26, 2026
हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान समेत कई मुस्लिम देशों से अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने और इजरायल को मान्यता देने की अपील की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान अपनी पुरानी नीति पर कायम है और जब तक 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र नहीं बनता, तब तक पाकिस्तान इजरायल को मान्यता नहीं देगा। ख्वाजा आसिफ के बयान के बाद अमेरिका में भी प्रतिक्रिया देखने को मिली। अमेरिकी रिपब्लिकन नेता लिंडसे ग्राहम (Lindsey Graham) ने पाकिस्तान की भूमिका और उसकी नीतियों पर सवाल उठाए। पाकिस्तान ने अपने 78 साल के इतिहास में कभी भी आधिकारिक तौर पर इजरायल (Israel) को मान्यता नहीं दी है। यहां तक कि पाकिस्तानी पासपोर्ट पर भी साफ लिखा होता है कि यह इजरायल यात्रा के लिए मान्य नहीं है।