Indian Currency: बदल जाएगी आपकी जेब की करेंसी, भारत में जल्द शुरू होगा प्लास्टिक नोटों का सार्वजनिक परीक्षण

Edited By Updated: 29 May, 2026 09:45 AM

currency in your pocket is hange public trials for plastic banknotes

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की बढ़ती मांग और छपाई की बढ़ती लागत से निपटने के लिए एक बार फिर पॉलिमर (प्लास्टिक) नोट पेश करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पटना और मुंबई में हुई केंद्रीय बैंक की हालिया बोर्ड...

बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश में करेंसी नोटों की बढ़ती मांग और छपाई की बढ़ती लागत से निपटने के लिए एक बार फिर पॉलिमर (प्लास्टिक) नोट पेश करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, पटना और मुंबई में हुई केंद्रीय बैंक की हालिया बोर्ड बैठकों में इस पर विस्तार से चर्चा की गई है। सूत्रों ने बताया कि यह फैसला इसलिए लिया गया है क्योंकि प्लास्टिक के नोट बनाने में खर्च कम आएगा और वे लंबे समय तक चलेंगे। प्ला​स्टिक नोटों के सार्वजनिक प्रयोग का परीक्षण शुरू करने की घोषणा जल्द हो सकती है।

इस बदलाव के मुख्य कारण और फायदे

आंकड़ों के अनुसार, नोटों की छपाई का खर्च वित्त वर्ष 2023-24 के 5,101.4 करोड़ रुपए से बढ़कर 2024-25 में 6,372.8 करोड़ रुपए हो गया है। पॉलिमर नोटों के उत्पादन में कागज के मुकाबले कम खर्च आने का अनुमान है।

प्लास्टिक के नोट कागज के नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ होते हैं और लंबे समय तक चलते हैं। वर्तमान में फटे-पुराने नोटों का निपटान एक बड़ी चुनौती है। वित्त वर्ष 2024-25 में ही 2,38,563 लाख ऐसे नोटों का निपटान किया गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष के 2,12,493 लाख नोटों से अधिक है। इन नोटो में सबसे अधिक संख्या 500 रुपए और 100 रुपए के नोटों की थी

तकनीकी बाधाओं का समाधान

हालांकि 2012 में तकनीकी चुनौतियों के कारण इस परियोजना को रोक दिया गया था लेकिन अब तकनीक इतनी उन्नत हो गई है कि एटीएम (ATM) इन नोटों को आसानी से पहचान और निकाल सकेंगे। 

आरबीआई ने बाजार में सिक्कों के चलन को बढ़ावा देने के प्रयास किए थे लेकिन इसके अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। सिक्कों की कुल आपूर्ति 2023-24 में 12,056 लाख से बढ़कर 2024-25 में 15,000 लाख हो गई, जिनमें से 8,000 लाख 5 रुपए के सिक्के और उसके बाद 4,000 लाख 20 रुपए के सिक्के थे। साल 2012 में तत्कालीन सरकार ने 5 शहरों में प्रायोगिक तौर पर पॉलिमर से बने 10 रुपए के एक अरब नोट जारी करने का निर्णय लिया था।

वैश्विक स्थिति

भारत इस दिशा में कदम उठाने वाला अकेला देश नहीं है। दुनिया के लगभग 60 देश पहले से ही पॉलिमर नोटों का उपयोग कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया ने सबसे पहले 1988 में इन्हें अपनाया था, जिसके बाद सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया जैसे देशों ने भी इसी तकनीक को लागू किया। जल्द ही आरबीआई इन प्लास्टिक नोटों के सार्वजनिक परीक्षण की घोषणा कर सकता है।  
 

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