Edited By jyoti choudhary,Updated: 05 Mar, 2026 04:45 PM

भारतीय चावल निर्यात संघ (आईआरईएफ) ने सरकार से ईरान संकट और प्रमुख समुद्री मार्गों में अस्थिरता के कारण पैदा हुए व्यवधान के प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल सहायता मांगी है। चावल निर्यातकों के निकाय ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास...
नई दिल्लीः भारतीय चावल निर्यात संघ (आईआरईएफ) ने सरकार से ईरान संकट और प्रमुख समुद्री मार्गों में अस्थिरता के कारण पैदा हुए व्यवधान के प्रभाव को कम करने के लिए तत्काल सहायता मांगी है। चावल निर्यातकों के निकाय ने कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) को दिए अपने ज्ञापन में कहा कि निर्यातक इस वक्त कंटेनर की भारी कमी, पश्चिम एशिया के लिए जहाजों को रद्द किए जाने तथा लॉजिस्टिक लागत में भारी वृद्धि का सामना कर रहे हैं।
ज्ञापन के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई दरों में लगभग 15-20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि खाड़ी देशों को जाने वाली खेपों के लिए युद्ध-जोखिम अधिभार और बीमा प्रीमियम में काफी बढ़ोतरी हुई है। समुद्री ईंधन (बंकर फ्यूल) की कीमतें भी लगभग 520 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 580 डॉलर प्रति टन के करीब पहुंच गई हैं। इन व्यवधान का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ा है। पिछले 72 घंटों में बासमती चावल की कीमतों में लगभग 7-10 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे निर्यातकों पर कार्यशील पूंजी का दबाव बढ़ गया है।
आईआरईएफ के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा, ''हमारे निर्यातक माल ढुलाई, ईंधन और बीमा लागत में अचानक आए झटकों को वहन नहीं कर सकते, जबकि निर्यात में देरी हो रही है।'' उन्होंने निर्यात अनुबंधों, नकदी प्रवाह और भारत की निर्यात प्रतिबद्धताओं की रक्षा के लिए समयबद्ध राहत उपायों और स्पष्ट दिशानिर्देशों की मांग की।