Edited By Niyati Bhandari,Updated: 05 Mar, 2026 07:05 AM

Holi Bhai Dooj 2026: होली के पावन पर्व के बाद मनाया जाने वाला होली भाई दूज भाई-बहन के स्नेह और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किया...
Holi Bhai Dooj 2026: होली के पावन पर्व के बाद मनाया जाने वाला होली भाई दूज भाई-बहन के स्नेह और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में किया गया तिलक और पूजन विशेष फलदायी होता है। आइए जानते हैं होली भाई दूज के शुभ मुहूर्त और पूजा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।
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Holi Bhai Dooj Shubh Muhurat होली भाई दूज का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष होली भाई दूज के लिए दिनभर में कई शुभ काल बन रहे हैं, जिनमें तिलक और पूजन करना अत्यंत मंगलकारी माना गया है।

ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 05:18 AM से 06:06 ए एम तक
प्रातः सन्ध्या: 05:42 AM से 06:55 ए एम तक
गोधूलि मुहूर्त: सायं 06:43 PM से 07:07 पी एम तक
सायाह्न सन्ध्या: 06:45 PM से 07:58 पी एम तक
इन समयों में विशेष रूप से ब्रह्म मुहूर्त और गोधूलि मुहूर्त को अत्यंत पवित्र माना गया है। यदि संभव हो तो बहनें इन शुभ काल में अपने भाई का तिलक करें।

होली भाई दूज का धार्मिक महत्व
होली भाई दूज को भाई-बहन के प्रेम का उत्सव कहा जाता है। यह पर्व इस बात का प्रतीक है कि परिवार में स्नेह, सहयोग और विश्वास का संबंध सदैव बना रहना चाहिए। मान्यता है कि इस दिन बहन द्वारा विधि-विधान से तिलक करने पर भाई को दीर्घायु, यश और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भाई को भोजन कराना और उपहार देना शुभ माना जाता है। इससे रिश्तों में मधुरता और अपनापन बढ़ता है।

होली भाई दूज पूजा विधि
सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा थाली में रोली, चावल, दीपक, मिठाई और नारियल रखें। शुभ मुहूर्त में भाई को आसन पर बैठाएं। भाई के माथे पर रोली और अक्षत का तिलक लगाएं। आरती उतारकर उसकी लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना करें।
मिठाई खिलाकर उपहार दें।
होली भाई दूजके लिए विशेष सुझाव
शुभ मुहूर्त में तिलक करने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। बहनों को चाहिए कि तिलक करते समय मन में सच्ची भावना और प्रार्थना रखें। भाई भी बहन की रक्षा और सम्मान का संकल्प लें।
