Edited By jyoti choudhary,Updated: 27 Jan, 2026 06:16 PM

ईरान की मुद्रा रियाल मंगलवार को टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। अनौपचारिक बाजार (ब्लैक मार्केट या ओपन मार्केट) में एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रियाल 14.8 लाख से 15 लाख के बीच फिसल चुका है, जो अब तक का सबसे खराब रिकॉर्ड माना जा रहा है।...
बिजनेस डेस्कः ईरान की मुद्रा रियाल मंगलवार को टूटकर अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। अनौपचारिक बाजार (ब्लैक मार्केट या ओपन मार्केट) में एक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रियाल 14.8 लाख से 15 लाख के बीच फिसल चुका है, जो अब तक का सबसे खराब रिकॉर्ड माना जा रहा है। यह गिरावट ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहराते संकट की तस्वीर साफ तौर पर पेश करती है।
27 जनवरी 2026 की सुबह ओपन मार्केट में एक डॉलर की कीमत करीब 15,04,000 रियाल दर्ज की गई, जो एक दिन में लगभग 2.5 फीसदी की और गिरावट को दर्शाती है। जनवरी की शुरुआत में जहां डॉलर करीब 14.7 लाख रियाल के आसपास था, वहीं कुछ रिपोर्ट्स में इसके 16.5 लाख तक पहुंचने की भी आशंका जताई गई है।
गिरावट के पीछे कई बड़े कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि रियाल की इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे कई बड़े कारण हैं। अमेरिका और पश्चिमी देशों के सख्त अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते ईरान का तेल निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे देश में डॉलर की भारी कमी पैदा हो गई है। इसके साथ ही महंगाई ने आम लोगों की कमर तोड़ दी है। दिसंबर 2025 में ईरान में महंगाई दर 42 फीसदी से ज्यादा दर्ज की गई, जबकि खाद्य पदार्थों की कीमतों में 70 फीसदी से अधिक का उछाल आया। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का अनुमान है कि 2026 में भी महंगाई 40 फीसदी के आसपास बनी रह सकती है।
सरकारी नीतियां भी इस संकट को और गहरा कर रही हैं। सब्सिडी वाले डॉलर को खत्म किए जाने से आयात महंगा हो गया है, जिसका सीधा असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ा है। वहीं, लोगों का रियाल से भरोसा लगातार टूटता जा रहा है। बड़ी संख्या में लोग अपनी बचत को डॉलर, सोने और प्रॉपर्टी में बदल रहे हैं, जिससे रियाल पर दबाव और बढ़ गया है। इजराइल के साथ बढ़ता तनाव, युद्ध की आशंकाएं और घरेलू आर्थिक नीतियों की कमजोरियां भी मुद्रा को कमजोर कर रही हैं।