भारत-ईरान के बीच क्या-क्या होता है व्यापार? जानिए पूरी लिस्ट

Edited By Updated: 28 Feb, 2026 05:39 PM

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मध्यपूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। Iran और Israel के बीच हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं। United States की सक्रिय भूमिका ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में भारत के लिए यह केवल कूटनीतिक चिंता...

बिजनेस डेस्कः मध्यपूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। Iran और Israel के बीच हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद क्षेत्रीय स्थिरता पर सवाल खड़े हो गए हैं। United States की सक्रिय भूमिका ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में भारत के लिए यह केवल कूटनीतिक चिंता नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

भारत-ईरान संबंध

भारत और ईरान के रिश्ते ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक आधार पर मजबूत रहे हैं। सदियों पुराने संपर्कों ने दोनों देशों को ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के क्षेत्र में साझेदार बनाया है। मौजूदा तनाव के बीच यह सवाल अहम है कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो द्विपक्षीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर कितना असर पड़ेगा।

भारत का निर्यात

ईरान भारतीय बासमती चावल का बड़ा आयातक रहा है। इसके अलावा भारत से दवाइयां, गेहूं, चीनी, चाय, सूती कपड़े, ऑटो पार्ट्स और इंजीनियरिंग सामान भी निर्यात होते हैं। फार्मास्यूटिकल्स सेक्टर में भारत की मजबूत पकड़ ईरान के लिए महत्वपूर्ण है, खासकर तब जब उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का दबाव रहा हो।

ईरान से भारत को क्या मिलता है?

ऊर्जा क्षेत्र में ईरान कभी भारत के प्रमुख कच्चा तेल आपूर्तिकर्ताओं में रहा है। इसके अलावा पिस्ता, खजूर जैसे सूखे मेवे, पेट्रोकेमिकल उत्पाद और कुछ विशेष रसायन भी भारत आयात करता है। हालांकि अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते तेल आयात में उतार-चढ़ाव आया लेकिन व्यापारिक संपर्क पूरी तरह समाप्त नहीं हुए।

रुपया-रियाल तंत्र और रणनीतिक सहयोग

डॉलर आधारित लेन-देन में बाधाओं के बाद दोनों देशों ने रुपया-रियाल तंत्र के जरिए व्यापार को जारी रखा। ऊर्जा सुरक्षा, आईटी, खनन और फार्मा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बना रहा है। यह व्यवस्था प्रतिबंधों के बीच भी आर्थिक रिश्तों को बनाए रखने का एक व्यावहारिक समाधान रही है।

चाबहार पोर्ट

ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत का निवेश केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी रखता है। यह परियोजना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक भारत की सीधी पहुंच सुनिश्चित करती है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होती है। मौजूदा तनाव के बीच इस प्रोजेक्ट की अहमियत और बढ़ जाती है।

सांस्कृतिक रिश्तों की मजबूत नींव

भारत और ईरान का संबंध सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है। फारसी भाषा का भारतीय इतिहास, साहित्य और प्रशासन पर गहरा प्रभाव रहा है। सूफी परंपरा के प्रसार में भी ईरान की अहम भूमिका रही है। यही ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जुड़ाव दोनों देशों के रिश्तों को दीर्घकालिक मजबूती प्रदान करता है।
 

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