शुद्ध बाजार उधारी वित्त वर्ष 2026-27 में GDP के तीन प्रतिशत तक आएगी: आरबीआई बुलेटिन

Edited By Updated: 21 Feb, 2026 12:36 PM

net market borrowing will reach three percent of gdp in fiscal year 2026 27 rbi

सरकार की शुद्ध बाजार उधारी में गिरावट से निजी क्षेत्र के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होने की संभावना है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के शुक्रवार को जारी मासिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक, केंद्र सरकार की शुद्ध बाजार उधारी...

मुंबईः सरकार की शुद्ध बाजार उधारी में गिरावट से निजी क्षेत्र के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध होने की संभावना है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के शुक्रवार को जारी मासिक बुलेटिन में यह जानकारी दी गई। आरबीआई बुलेटिन के मुताबिक, केंद्र सरकार की शुद्ध बाजार उधारी वित्त वर्ष 2026-27 में जीडीपी के तीन प्रतिशत तक घटाने का प्रस्ताव है, जो महामारी-पूर्व स्तर की ओर धीरे-धीरे वापसी का संकेत है। इस साल के लिए 17.3 लाख करोड़ रुपए की सकल बाजार उधारी का प्रस्ताव कई लोगों की अपेक्षाओं से अधिक माना गया है। इससे निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध संसाधनों और बजट दिवस पर बाजार में गिरावट को लेकर चिंता हुई। 

आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, शुद्ध बाजार उधारी महामारी से पहले वित्त वर्ष 2019-20 में 4.73 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 2.4 प्रतिशत) थी। यह वित्त वर्ष 2020-21 में बढ़कर 10.33 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 5.2 प्रतिशत) हो गई थी और इसके बाद के वर्षों में महामारी पूर्व स्तर से अधिक रही, जो वित्त वर्ष 2022-23 में जीडीपी का 4.1 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2023-24 में 3.9 प्रतिशत थी। बुलेटिन के मुताबिक, "केंद्र सरकार की शुद्ध बाजार उधारी की जीडीपी के अनुपात में क्रमिक गिरावट महामारी-पूर्व स्तर की ओर निजी क्षेत्र के लिए संसाधनों की उपलब्धता को बढ़ाने में मदद करेगी।" 

वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट में सकल बाजार उधारी 17.2 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 4.4 प्रतिशत) और शुद्ध बाजार उधारी 11.7 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का तीन प्रतिशत) रहने का लक्ष्य है। वित्त वर्ष 2024-25 में शुद्ध बाजार उधारी 11.63 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 3.5 प्रतिशत) और वित्त-वर्ष 2025-26 में 11.32 लाख करोड़ रुपए (जीडीपी का 3.2 प्रतिशत) थी। बुलेटिन के मुताबिक, शुद्ध बाजार उधारी में कमी आने से घरेलू वित्तीय बाजार पर दबाव कम होगा। 
 

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