इस देश के लोगों को मनचाहा टीवी चैनल देखने की नहीं है आज़ादी, वजह जानकर उड़ जाएंगे होश

Edited By Updated: 21 Feb, 2026 04:41 PM

citizens in this country cannot choose their own tv channels know why

उत्तर कोरिया में टेलीविजन और मीडिया पर सरकार का सख्त नियंत्रण है। नागरिक अपनी पसंद के चैनल नहीं देख सकते, क्योंकि टीवी सेट पहले से सरकारी फ्रीक्वेंसी पर लॉक होते हैं। विदेशी समाचार, फिल्म या कार्यक्रम देखना प्रतिबंधित है और ऐसा करने पर कड़ी सजा का...

नेशनल डेस्क : नोर्थ कोरिया दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां सूचना और मीडिया पर सरकार का कड़ा नियंत्रण है। जहां अधिकांश देशों में लोग रिमोट के जरिए अपनी पसंद के चैनल चुन सकते हैं, वहीं उत्तर कोरिया में नागरिकों को यह स्वतंत्रता प्राप्त नहीं है। यहां टेलीविजन प्रसारण पूरी तरह से सरकार के नियंत्रण में होता है और विदेशी चैनल या स्वतंत्र कार्यक्रम देखना प्रतिबंधित है।

सरकारी नियंत्रण वाले टीवी सेट

उत्तर कोरिया में बिकने वाले टेलीविजन सेट पहले से इस तरह सेट किए जाते हैं कि वे केवल सरकार द्वारा स्वीकृत फ्रीक्वेंसी ही पकड़ सकें। टीवी खरीदने के बाद लोगों को उसे स्थानीय प्रशासन के पास पंजीकृत कराना पड़ता है। बताया जाता है कि अधिकारी चैनलों को तकनीकी रूप से लॉक कर देते हैं और सेट पर आधिकारिक सील लगा दी जाती है, ताकि उसमें कोई बदलाव न किया जा सके।

आम तौर पर इन टीवी सेटों पर एक से चार सरकारी चैनल ही देखे जा सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख चैनल Korean Central Television है, जो सरकारी नीतियों और नेतृत्व से जुड़े कार्यक्रम प्रसारित करता है। विदेशी समाचार, मनोरंजन कार्यक्रम या स्वतंत्र मीडिया देखने का कोई कानूनी तरीका आम नागरिकों के लिए उपलब्ध नहीं है।

विचारधारा को बढ़ावा देने का माध्यम

देश में प्रसारित होने वाला अधिकांश कंटेंट सरकार और शीर्ष नेतृत्व के प्रति निष्ठा को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया जाता है। कार्यक्रमों में राष्ट्रीय उपलब्धियों, सैन्य ताकत और समाजवादी मूल्यों को प्रमुखता दी जाती है। बाहरी दुनिया से जुड़ी जानकारी को सीमित रखकर सरकार राजनीतिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर नियंत्रण बनाए रखती है। इससे नागरिकों को वैकल्पिक दृष्टिकोण या विदेशी संस्कृति तक पहुंच नहीं मिल पाती।

विदेशी कंटेंट देखने पर कड़ी सजा

उत्तर कोरिया में दक्षिण कोरिया या पश्चिमी देशों के टीवी शो, फिल्में या संगीत देखना और साझा करना गंभीर अपराध माना जाता है। ऐसे मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार दोषी पाए जाने पर लोगों को लंबे समय तक श्रम दंड या अन्य कठोर दंड झेलने पड़ सकते हैं। गंभीर मामलों में सजा और भी सख्त हो सकती है।

अचानक जांच और निगरानी

रिपोर्ट्स बताती हैं कि समय-समय पर अधिकारियों द्वारा घरों की जांच की जाती है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टीवी सेट के लॉक से छेड़छाड़ नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां उपकरणों की जांच कर यह भी देखती हैं कि कहीं अवैध बदलाव तो नहीं किया गया।

टेलीविजन पर यह सख्ती एक व्यापक मीडिया नियंत्रण व्यवस्था का हिस्सा है, जिसमें सीमित इंटरनेट सुविधा, सरकारी अखबार और नियंत्रित रेडियो प्रसारण शामिल हैं। इन सभी उपायों का उद्देश्य राजनीतिक नियंत्रण बनाए रखना, बाहरी प्रभाव को सीमित करना और सरकारी विचारधारा को प्रमुख बनाए रखना है।

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