Edited By Niyati Bhandari,Updated: 20 Feb, 2026 05:16 PM

Phalguna Vinayaka Chaturthi February 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विघ्नहर्ता Ganesha को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और...
Phalguna Vinayaka Chaturthi February 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को विनायक चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विघ्नहर्ता Ganesha को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा और व्रत करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि का वास होता है। वर्ष 2026 में 21 फरवरी को फाल्गुन विनायक चतुर्थी पर विशेष संयोग बन रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है।

फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026 शुभ मुहूर्त: पंचांग के अनुसार तिथियां इस प्रकार हैं-
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 20 फरवरी 2026, दोपहर 02:38 बजे
चतुर्थी तिथि समापन: 21 फरवरी 2026, दोपहर 01:00 बजे
मुख्य व्रत (उदयातिथि अनुसार): 21 फरवरी 2026
मध्याह्न पूजा मुहूर्त: सुबह 11:27 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक
इस बार चतुर्थी पर शुक्ल योग और रवि योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिष मान्यता के अनुसार ये योग पूजा के फल को कई गुना बढ़ा सकते हैं। इन योगों का प्रभाव शाम से लेकर रात्रि तक रहेगा।

चंद्र दर्शन से बचें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विनायक चतुर्थी के दिन चंद्र दर्शन वर्जित माना गया है। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन चंद्रमा को देखने से ‘कलंक’ लगने का दोष माना जाता है। इसलिए भक्तों को इस दिन चंद्र दर्शन से बचने की सलाह दी जाती है।

विनायक चतुर्थी का महत्व
शास्त्रों में विनायक चतुर्थी को संकटों का नाश करने वाली तिथि बताया गया है। फाल्गुन मास की चतुर्थी को विशेष फलदायी माना जाता है क्योंकि यह नई ऊर्जा और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से बुद्धि और ज्ञान में वृद्धि होती है। करियर और व्यवसाय में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। मानसिक शांति प्राप्त होती है। ऐश्वर्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है।

विनायक चतुर्थी की पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की प्रतिमा को लाल वस्त्र पर स्थापित करें।
गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें।
सिंदूर, अक्षत और 21 गांठ दूर्वा अर्पित करें।
मोदक या लड्डू का भोग लगाएं।
गणेश चालीसा का पाठ करें और घी के दीपक से आरती करें।
सामर्थ्य अनुसार अन्न, वस्त्र या धन का दान करें।
फाल्गुन विनायक चतुर्थी श्रद्धा और भक्ति का पर्व है। इस दिन किए गए व्रत, जप और पूजा से जीवन में सकारात्मकता और स्थिरता आने की मान्यता है। हालांकि धार्मिक मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं लेकिन सच्ची श्रद्धा और सत्कर्म से ही जीवन में वास्तविक सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।
