7.8% GDP ग्रोथ अच्छी, लेकिन विकसित भारत 2047 के लिए नहीं पर्याप्त: विशेषज्ञ

Edited By Updated: 08 Sep, 2026 11:33 AM

7 8 gdp growth is good but not enough for  viksit bharat 2047

भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। हालांकि, देश के दो प्रमुख अर्थशास्त्रियों सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि

नई दिल्लीः भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8% की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच यह प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा। हालांकि, देश के दो प्रमुख अर्थशास्त्रियों सुरजीत भल्ला और मोंटेक सिंह अहलूवालिया का मानना है कि मौजूदा विकास दर भारत को 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के लिए पर्याप्त नहीं है। दोनों विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत को लंबे समय तक इससे कहीं अधिक तेज आर्थिक विकास की जरूरत होगी।

दो बड़े अर्थशास्त्रियों ने क्या कहा?

सुरजीत भल्ला, जो IMF में भारत के पूर्व कार्यकारी निदेशक रह चुके हैं, ने कहा कि उन्हें अभी भी नहीं लगता कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य मौजूदा रफ्तार से हासिल हो पाएगा। उनके अनुसार, भारत को लगातार दोहरे अंकों की विकास दर हासिल करनी होगी। खासतौर पर डॉलर के लिहाज से तेज वृद्धि जरूरी है, क्योंकि विकसित अर्थव्यवस्था का आकलन इसी आधार पर किया जाता है।

वहीं, योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने कहा कि भारत अभी अपने दीर्घकालिक लक्ष्य की राह पर पूरी तरह नहीं पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इसके लिए बहुत अधिक विकास दर जरूरी होगी। उनका यह भी कहना है कि केवल GDP बढ़ने से यह साबित नहीं होता कि विकास का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंच रहा है।

अहलूवालिया ने K-शेप्ड रिकवरी की ओर भी ध्यान दिलाया। उनके मुताबिक, अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्से तेजी से विकसित हो रहे हैं, जबकि छोटे कारोबार, अनौपचारिक क्षेत्र और कम आय वाले वर्ग उतना लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

रोजगार भी बड़ी चुनौती

2047 के लक्ष्य के लिए रोजगार एक अहम चुनौती है। अहलूवालिया ने कहा कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर जैसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्र पूंजी आधारित हैं और बड़ी संख्या में रोजगार पैदा करने में सक्षम नहीं हो सकते। दूसरी ओर, भल्ला का मानना है कि समस्या नौकरियों की कमी से ज्यादा शिक्षित युवाओं की योग्यता और उपलब्ध नौकरियों के बीच असंतुलन की है।

अर्थशास्त्री रोहित लांबा ने भी कहा कि भारत ने चीन और दक्षिण कोरिया से अलग विकास का रास्ता अपनाया है। भारत में मैन्युफैक्चरिंग के बजाय सर्विस सेक्टर तेजी से बढ़ा है।

सुधारों पर जोर

विशेषज्ञों के अनुसार, विकसित भारत के लक्ष्य के लिए भारत को व्यापार को अधिक खोलने, टैरिफ घटाने, वैश्विक बाजार से जुड़ने और व्यापक आर्थिक सुधारों पर जोर देना होगा। अहलूवालिया ने कहा कि भारत को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर भरोसा करते हुए अधिक खुली अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

कुल मिलाकर, 7.8% की GDP ग्रोथ उत्साहजनक है लेकिन 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए लंबे समय तक तेज और समावेशी विकास, बेहतर रोजगार तथा बड़े आर्थिक सुधार जरूरी होंगे।
 

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