Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Jul, 2026 03:07 PM

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज से समय से पहले ही बाहर निकलने वाले पॉलिसीधारकों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। केंद्रीय बैंक की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में कहा गया है कि अब सरेंडर और निकासी की रकम मैच्योरिटी पर मिलने...
बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसीज से समय से पहले ही बाहर निकलने वाले पॉलिसीधारकों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। केंद्रीय बैंक की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में कहा गया है कि अब सरेंडर और निकासी की रकम मैच्योरिटी पर मिलने वाले पेमेंट से ज्यादा हो गई है। इसे पॉलिसीधारकों की असंतुष्टि और संभावित मिस-सेलिंग का संकेत माना गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों ने कुल 7.3 लाख करोड़ रुपए के बेनिफिट्स का भुगतान किया, जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में यह राशि लगभग 5 लाख करोड़ रुपए थी। इनमें सरेंडर और निकासी का हिस्सा 38.3 प्रतिशत रहा, जबकि मैच्योरिटी बेनिफिट्स का हिस्सा 36.9 प्रतिशत दर्ज किया गया।
समय से पहले पॉलिसी छोड़ने का बढ़ा चलन
रिपोर्ट के अनुसार सरेंडर और मैच्योरिटी भुगतान के बीच लगभग बराबरी इस बात का संकेत है कि बड़ी संख्या में पॉलिसीधारक तय अवधि पूरी होने से पहले ही अपनी पॉलिसी बंद कर रहे हैं। इससे बीमा कंपनियों के एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट पर असर पड़ता है और उन्हें समय से पहले निवेश बेचने की नौबत आ सकती है।
मिस-सेलिंग और बढ़ती लागत चिंता का कारण
रिपोर्ट में कहा गया है कि लगातार ऊंची सरेंडर दरें ग्राहकों की असंतुष्टि, उत्पादों की गलत बिक्री (मिस-सेलिंग) या अन्य निवेश विकल्पों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा की ओर इशारा करती हैं। साथ ही, डिस्ट्रीब्यूशन और एक्विजिशन कॉस्ट बढ़ने से भी मिस-सेलिंग का जोखिम बढ़ जाता है।
आरबीआई ने यह भी बताया कि निजी जीवन बीमा कंपनियों में वित्त वर्ष 2022 के बाद से कमीशन अनुपात में लगभग दोगुनी बढ़ोतरी हुई है, जबकि परिचालन खर्च का अनुपात लगभग स्थिर बना हुआ है।
सुधार की तैयारी में नियामक
बीमा नियामक आईआरडीएआई के चेयरमैन अजय सेठ ने हाल ही में कहा था कि पॉलिसीधारकों को उत्पाद की उपयुक्तता बेहतर ढंग से समझाने और डिस्ट्रीब्यूशन प्रक्रिया में सुधार के लिए नियामक स्तर पर काम किया जा रहा है। इसके तहत ग्राहकों को पॉलिसी के लाभ और शर्तों की स्पष्ट जानकारी देना अनिवार्य किया जा सकता है।
उद्योग के पिछले आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में बीमा कंपनियों ने कुल 6.3 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया था। इसमें 2.3 लाख करोड़ रुपए सरेंडर और निकासी तथा 2.2 लाख करोड़ रुपए मैच्योरिटी बेनिफिट्स के रूप में दिए गए थे।