Edited By jyoti choudhary,Updated: 17 Jul, 2026 06:16 PM

भारत में जल्द ही प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोट चलन में आ सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नोट छापने वाली इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने पॉलीमर सब्सट्रेट शीट के निर्माण और आपूर्ति के लिए वैश्विक स्तर पर रुचि की...
बिजनेस डेस्कः भारत में जल्द ही प्लास्टिक (पॉलीमर) के नोट चलन में आ सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नोट छापने वाली इकाई भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने पॉलीमर सब्सट्रेट शीट के निर्माण और आपूर्ति के लिए वैश्विक स्तर पर रुचि की अभिव्यक्ति (EOI) आमंत्रित की है। इसे भारत में पॉलीमर करेंसी की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआती कदम माना जा रहा है।
हालांकि, RBI ने अभी तक प्लास्टिक नोट जारी करने की कोई आधिकारिक समयसीमा घोषित नहीं की है। फिलहाल प्रक्रिया शुरुआती चरण में है और आगे कई तकनीकी व नियामकीय मंजूरियां बाकी हैं।
किन नोटों से हो सकती है शुरुआत?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पायलट परियोजना शुरू होती है तो सबसे पहले 10 और 20 रुपए के नोट पॉलीमर में जारी किए जा सकते हैं। इसकी वजह यह है कि कम मूल्य वाले नोट सबसे अधिक उपयोग में आते हैं और जल्दी खराब भी हो जाते हैं।
RBI की तैयारी क्यों मानी जा रही है अहम?
BRBNMPL देश की प्रमुख करेंसी प्रिंटिंग इकाई है, जो मैसूरु और सालबोनी स्थित प्रेस में भारतीय नोट छापती है। ऐसे में पॉलीमर शीट की खरीद के लिए वैश्विक निविदा जारी होना इस दिशा में गंभीर तैयारी का संकेत माना जा रहा है।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 जून 2026 की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद कहा था कि पॉलीमर नोटों का प्रस्ताव अभी विचाराधीन है और केंद्रीय बैंक इसके लाभ और संभावित चुनौतियों का मूल्यांकन कर रहा है।
क्या होते हैं पॉलीमर नोट?
पॉलीमर नोट विशेष प्रकार की मजबूत प्लास्टिक फिल्म पर तैयार किए जाते हैं। इन पर विशेष कोटिंग की जाती है, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली छपाई संभव होती है। इनमें पारदर्शी सुरक्षा विंडो और आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स शामिल होते हैं, जिससे नकली नोट बनाना बेहद कठिन हो जाता है।
पॉलीमर नोटों के प्रमुख फायदे
- कागजी नोटों की तुलना में ढाई से चार गुना अधिक टिकाऊ।
- पानी, नमी और गंदगी से कम प्रभावित।
- आसानी से नहीं फटते और लंबे समय तक उपयोग योग्य रहते हैं।
- आधुनिक सुरक्षा फीचर्स के कारण नकली नोट बनाना अधिक कठिन।
- कुछ अध्ययनों के अनुसार इनकी सतह पर बैक्टीरिया भी अपेक्षाकृत कम टिकते हैं।