विपणन वर्ष 2025-26 में अब तक चीनी उत्पादन 10% बढ़कर 2.62 करोड़ टन पर: इस्मा

Edited By Updated: 17 Mar, 2026 06:17 PM

sugar production rises 10 to 26 2 million tonnes so far in marketing year 2025

चालू विपणन वर्ष 2025-26 में अब तक भारत का चीनी उत्पादन दो करोड़ 62.1 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि से 10.5 प्रतिशत अधिक है। उद्योग निकाय इस्मा ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अब तक का चीनी उत्पादन, 2024-25 के पूरे विपणन वर्ष...

नई दिल्लीः चालू विपणन वर्ष 2025-26 में अब तक भारत का चीनी उत्पादन दो करोड़ 62.1 लाख टन तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि से 10.5 प्रतिशत अधिक है। उद्योग निकाय इस्मा ने मंगलवार को यह जानकारी दी। अब तक का चीनी उत्पादन, 2024-25 के पूरे विपणन वर्ष (अक्टूबर-सितंबर) के कुल शुद्ध उत्पादन दो करोड़ 61.2 लाख टन से ज़्यादा हो गया है। गन्ने की पेराई का काम जारी है। 15 मार्च तक 157 मिलें चालू थीं, जबकि 379 मिलें बंद रहीं। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (इस्मा) के अनुसार, मिलों ने विपणन वर्ष 2025-26 के 15 मार्च तक दो करोड़ 62.1 लाख टन चीनी का उत्पादन किया है, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह दो करोड़ 37.2 लाख टन था। जैसे-जैसे चीनी का सत्र आगे बढ़ रहा है और अपने आखिरी चरण में पहुंच रहा है, इस्मा ने कहा कि वह न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में जल्द बढ़ोतरी का इंतज़ार कर रहा है। 

इस्मा ने एक बयान में कहा, ''उत्पादन लागत बढ़ने और मिल से होने वाली कमाई पिछड़ने से, मिलों पर नकदी प्रवाह का दबाव बढ़ रहा है, जिससे गन्ने के बकाया भुगतान में बढ़ोतरी हो रही है।'' महाराष्ट्र में, 28 फरवरी तक बकाया 4,898 करोड़ रुपए था, जो पिछले वर्ष इसी तारीख के 2,849 करोड़ रुपए से ज़्यादा है। इस्मा ने कहा, ''मौजूदा लागत ढांचे के हिसाब से एमएसपी में समय पर बढ़ोतरी करना मिलों की आर्थिक स्थिति को ठीक करने, किसानों को भुगतान में तेज़ी लाने और बाज़ार में स्थिरता बनाए रखने के लिए बहुत ज़रूरी है और इससे सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी नहीं पड़ेगा।'' 

उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में विपणन वर्ष 2025-26 में 15 मार्च तक चीनी उत्पादन बढ़कर 98.4 लाख टन हो गया, जो पिछले वर्ष इसी अवधि में 78.7 लाख टन था। देश के दूसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन 81.3 लाख टन रहा, जबकि इसी अवधि में कर्नाटक में यह 46 लाख टन था। इस्मा ने कहा कि दक्षिण कर्नाटक की कुछ मिलों के जून/जुलाई से सितंबर, 2026 तक चलने वाले विशेष सत्र के दौरान फिर से काम शुरू करने की उम्मीद है।  

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