Edited By jyoti choudhary,Updated: 22 Jul, 2026 05:16 PM

अगर किसी प्रोडक्ट के पैकेट पर लिखा वजन और अंदर मौजूद सामान का वजन अलग निकले, तो ग्राहक कानूनी कार्रवाई कर सकता है। उत्तराखंड में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां Surf Excel के कम वजन वाले पैकेट को लेकर उपभोक्ता ने HUL के खिलाफ केस जीता और कंपनी को...
बिजनेस डेस्कः अगर किसी प्रोडक्ट के पैकेट पर लिखा वजन और अंदर मौजूद सामान का वजन अलग निकले, तो ग्राहक कानूनी कार्रवाई कर सकता है। उत्तराखंड में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां Surf Excel के कम वजन वाले पैकेट को लेकर उपभोक्ता ने HUL के खिलाफ केस जीता और कंपनी को मुआवजा देना पड़ा।
90 ग्राम की जगह निकला 70 ग्राम
मामला सितंबर 2020 उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर निवासी ज्ञान चंद्र गर्ग का है। गर्ग ने Surf Excel EW डिटर्जेंट का एक पैक खरीदा। आरोप है कि पैक पर 90 ग्राम लिखा था लेकिन तौलने पर उसका वजन केवल 70 ग्राम निकला। कंपनी और विक्रेता से समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, नैनीताल का रुख किया।
जिला आयोग ने HUL को ठहराया जिम्मेदार
सुनवाई के दौरान आयोग ने सीलबंद पैकेट का वजन कराया, जिसमें वजन 70 ग्राम ही पाया गया। आयोग ने HUL को मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के लिए 50,000 रुपए तथा मुकदमेबाजी खर्च के रूप में 10,000 रुपए देने का आदेश दिया। साथ ही अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए अलग से 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था।
राज्य आयोग ने मुआवजा घटाया
HUL ने इस आदेश को राज्य उपभोक्ता आयोग में चुनौती दी। राज्य आयोग ने माना कि कम वजन वाला उत्पाद बेचना अनुचित व्यापार व्यवहार है और कंपनी की अपील खारिज कर दी। हालांकि, आयोग ने मानसिक पीड़ा और आर्थिक नुकसान के लिए दिए गए मुआवजे को 50,000 रुपए से घटाकर 40,000 रुपए कर दिया। वहीं 10,000 रुपए का मुकदमेबाजी खर्च बरकरार रखा और 50,000 रुपए का अलग जुर्माना रद्द कर दिया।
कोर्ट ने क्या कहा?
राज्य आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत जिला आयोग को मामले की सुनवाई का पूरा अधिकार है। आयोग ने यह भी माना कि शिकायतकर्ता ने पर्याप्त और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर साबित किया कि उसे कम वजन वाला उत्पाद बेचा गया, जो स्पष्ट रूप से अनुचित व्यापार व्यवहार है।