Edited By Pardeep,Updated: 26 Apr, 2026 05:50 AM

इनकम टैक्स अपील ट्रिब्यूनल (ITAT) ने टैक्सपेयर्स को एक बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि केवल शक या अनुमान के आधार पर बैंक में जमा की गई नकदी को अघोषित आय (undisclosed income) नहीं माना जा सकता। ट्रिब्यूनल का यह फैसला विशेष रूप से उन लोगों के लिए...
नई दिल्ली: इनकम टैक्स अपील ट्रिब्यूनल (ITAT) ने टैक्सपेयर्स को एक बड़ी राहत देते हुए स्पष्ट किया है कि केवल शक या अनुमान के आधार पर बैंक में जमा की गई नकदी को अघोषित आय (undisclosed income) नहीं माना जा सकता। ट्रिब्यूनल का यह फैसला विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिन्होंने 2016 की नोटबंदी के दौरान घर में रखा कैश बैंक में जमा कराया था।
क्या है पूरा मामला?
यह फैसला 'ITO बनाम पूर्णिमा दास' के मामले में आया है। टैक्सपेयर ने साल 2016 में नोटबंदी से पहले अपने बैंक खाते से लगभग 15 लाख रुपये निकाले थे। बाद में, नोटबंदी के दौरान नवंबर-दिसंबर 2016 में उन्होंने वही रकम फिर से बैंक में जमा कर दी। आयकर विभाग ने इसे अघोषित आय मानते हुए टैक्स लगाने की कोशिश की और तर्क दिया कि इतनी बड़ी रकम घर में रखना सामान्य व्यवहार नहीं है।
विभाग का 'ह्यूमन प्रॉबेबिलिटी' तर्क खारिज
आकलन अधिकारी (AO) ने तर्क दिया था कि एक समझदार व्यक्ति ब्याज के लालच में पैसा बैंक या निवेश में रखता है, न कि घर में। हालांकि, ITAT ने इस दलील को मानने से इनकार कर दिया। ट्रिब्यूनल ने कहा कि:
- बैंक से पैसे निकालने के रिकॉर्ड स्पष्ट रूप से मौजूद थे।
- विभाग के पास इस बात का कोई सबूत नहीं था कि वह पैसा कहीं और खर्च किया गया है।
- केवल "असामान्य व्यवहार" या "कोई ऐसा नहीं करता" जैसे तर्कों के आधार पर टैक्स नहीं थोपा जा सकता; स्पष्टीकरण को गलत साबित करने के लिए ठोस सबूत चाहिए।
टैक्सपेयर्स के लिए बड़ी सीख
इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि मजबूत शक कभी भी सबूत की जगह नहीं ले सकता। आईटीएटी ने टैक्सपेयर्स को कुछ सुझाव भी दिए हैं:
- हमेशा अपने बैंक लेनदेन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
- नकदी के लेनदेन का हिसाब (कैश फ्लो) बनाकर रखें।
- बैंक स्टेटमेंट और आय के स्रोत में हमेशा तालमेल होना चाहिए।
इस ऐतिहासिक फैसले से अब उन हजारों टैक्सपेयर्स को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके पास नकदी का वैध स्रोत तो है, लेकिन विभाग उनके व्यवहार को 'असामान्य' मानकर सवाल उठा रहा था।