Edited By Niyati Bhandari,Updated: 20 Jan, 2026 09:14 AM

Dhekiakhowa Bornamghar vastu: असम के जोरहाट डिस्ट्रिक्ट स्थित ढेकियाखोवा बरनामघर, एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां असम के साथ-साथ देश-विदेश से दर्शन के लिए भक्तगण आते हैं। इस नामघर की स्थापना 1461 में संत और सुधारक माधवदेव ने की थी। यह नामघर...
Dhekiakhowa Bornamghar vastu: असम के जोरहाट डिस्ट्रिक्ट स्थित ढेकियाखोवा बरनामघर, एक महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है। यहां असम के साथ-साथ देश-विदेश से दर्शन के लिए भक्तगण आते हैं। इस नामघर की स्थापना 1461 में संत और सुधारक माधवदेव ने की थी। यह नामघर एकशरण नामधर्म वैष्णव परम्परा का बहुत महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यह 13 एकड़ के विशाल परिसर में फैला हुआ है। जहां भजन-कीर्तन, सत्संग, प्रार्थना तथा धार्मिक नाटक भी आयोजित किए जाते हैं। नामघर की वास्तुकला असमिया शैली में है।
यह नामघर असमिया संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका नाम ‘‘ढेकियाखोवा’’ एक घटना से उत्पन्न हुआ, जब माधवदेव को एक वृद्ध महिला ने ‘ढेकिया’ एक प्रकार की हरी वनस्पति (फर्न) से और खोवा (भोजन) परोसा और वे इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने यहां एक नामघर/प्रार्थना हॉल बनाने का निर्णय लिया।
यह नामघर अपने मिट्टी के अखंड दीपक के लिए भी प्रसिद्ध है, जो 1461 से लगातार जल रहा है, जो अटूट विश्वास और भक्ति का प्रतीक है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि ने इसे एशिया बुक ऑफ रिकॉर्डस और इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्डस में स्थान दिलाया है।
यूं तो असम में हर छोटे-बड़े शहर- कस्बां में नामघर हैं जहां स्थापित पवित्र गद्दी के सामने भक्तगण भजन-कीर्तन और धार्मिक नाटक करते हैं। परन्तु जॉरहाट स्थित ढेकियाखोवा बरनामघर सदियों से पूरे असम में बहुत अधिक प्रसिद्ध है। आइये इसकी भौगोलिक स्थिति का वास्तु विश्लेषण कर जानते हैं कि आखिर यह नामघर क्यों इतना अधिक प्रसिद्ध है।
ढेकियाखोवा बरनामघर के परिसर से सटकर बुड़ी दिया नदी बह रही है जो पश्चिम दिशा से होती हुई उत्तर दिशा की ओर घूमकर ईशान कोण में आगे बढ़ गई है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, जहां पश्चिम दिशा में नीचाई होती है तो उस स्थान पर धार्मिकता बहुत ज्यादा रहती है जैसाकि इस नामघर में है, उत्तर दिशा की नीचाई उस स्थान को प्रसिद्धि दिलाने में सहायक होती है। इसी कारण यह नामघर इतना प्रसिद्ध है।
नामघर के ईशान कोण में एक बहुत बड़ा कुंड है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, ईशान कोण में नीचाई हो तो वहां प्रसिद्धि के साथ-साथ धन आगमन भी होता है और उस स्थान के लिए लोगों की आस्था बहुत अधिक रहती है।
वास्तु गुरू कुलदीप सलूजा
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