Edited By Tanuja,Updated: 09 Mar, 2026 06:02 PM

ईरान के मिनाब शहर के एक स्कूल पर 28 फरवरी को हुए हमले में 165 से अधिक लोगों की मौत के मामले में नई जांच सामने आई है। जांच समूह बेलिंगकैट और विशेषज्ञों के विश्लेषण से संकेत मिलते हैं कि हमला संभवतः अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइल से हुआ था, हालांकि अमेरिका अभी...
International Desk: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के बीच ईरान के दक्षिणी शहर Minab में एक स्कूल पर हुए घातक हमले को लेकर नई जांच ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। जांच समूह Bellingcat और विशेषज्ञों के विश्लेषण से संकेत मिले हैं कि 28 फरवरी को हुए इस हमले में संभवतः अमेरिकी मिसाइल का इस्तेमाल हुआ था। इस हमले में 165 से अधिक लोगों की मौत हुई, जिनमें ज्यादातर बच्चे बताए जा रहे हैं।
वीडियो आया सामने
जांचकर्ताओं के अनुसार एक छोटा वीडियो सामने आया है जिसमें एक मिसाइल को इमारत पर गिरते देखा जा सकता है। विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञों ने इसे Tomahawk cruise missile बताया है। यह मिसाइल इस युद्ध में मुख्य रूप से United States के पास ही मौजूद मानी जाती है। यह वीडियो ईरान की अर्ध-सरकारी Mehr News Agency द्वारा जारी किया गया था और इसकी लोकेशन की पुष्टि स्वतंत्र जांचकर्ताओं ने भी की।
ट्रंप ने खारिज किए आरोप
हमले का निशाना बना स्कूल Islamic Revolutionary Guard Corps के एक सैन्य ठिकाने के पास स्थित था। विशेषज्ञों का कहना है कि संभव है कि सैन्य ठिकाने को निशाना बनाते समय स्कूल भी हमले की चपेट में आ गया हो। सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में भी यह संकेत मिला है कि परिसर में कई बम गिराए गए थे। इस घटना पर जब Donald Trump से सवाल किया गया तो उन्होंने अमेरिका की भूमिका से इनकार करते हुए कहा कि उनके अनुसार यह विस्फोट ईरान की ओर से हुआ हो सकता है। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने कहा है कि मामले की जांच की जा रही है।
घटना का आंतरिक आकलन शुरू
रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी सेना ने भी इस घटना को लेकर आंतरिक आकलन शुरू किया है। यह प्रक्रिया आम तौर पर तब शुरू होती है जब प्रारंभिक संकेत मिलते हैं कि हमले में अमेरिकी सेना की भूमिका हो सकती है।एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि शुरुआती संकेतों के आधार पर यह हमला संभवतः अमेरिकी कार्रवाई हो सकता है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष अभी बाकी है। इस घटना के बाद United Nations और मानवाधिकार संगठनों ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है। यदि किसी नागरिक स्कूल को निशाना बनाया गया है तो यह अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का गंभीर उल्लंघन माना जा सकता है।