Edited By Niyati Bhandari,Updated: 13 Oct, 2026 11:12 AM

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि दिल्ली-एन.सी.आर. (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में पटाखों पर पाबंदी लगाने पर विचार करते समय धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।
नई दिल्ली (एजैंसी): सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि दिल्ली-एन.सी.आर. (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में पटाखों पर पाबंदी लगाने पर विचार करते समय धार्मिक भावनाओं और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि लोगों को त्यौहार मनाने के ऐसे तरीके स्वेच्छा से अपनाने चाहिएं, जिनसे कम प्रदूषण फैले, न कि अदालत के प्रतिबंधात्मक आदेशों पर निर्भर रहना चाहिए।
पीठ एन.सी.आर. में वायु प्रदूषण से जुड़े पटाखे फोड़ने, पराली जलाने और ठोस कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई कर रही थी। चीफ जस्टिस ने कहा, “हमें लोगों को समझदार बनाना होगा, उनमें जागरूकता लानी होगी और उन्हें बताना होगा कि कौन से पटाखे अधिक नुकसानदायक हैं और कौन से कम नुकसानदायक।” न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने ज्यादा नुकसानदायक विकल्पों की उपलब्धता को सीमित करने के साथ-साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों (जैसे कि दीए जलाना और फुलझड़ियों का इस्तेमाल करना) पर आधारित संस्कृति को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बागची ने पटाखे जलाने के धार्मिक आधार पर सवाल उठाया।
उन्होंने पूछा, “पटाखे फोड़ने का धर्म से क्या संबंध है?” मामले में न्याय मित्र के रूप में शीर्ष अदालत की मदद कर रहीं वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजित सिंह ने पटाखों को धार्मिक रीति-रिवाजों से जोड़ने वाली दलीलों का जवाब देते हुए कहा, “अगर देवी-देवताओं को पता चले कि उनके नाम पर बच्चे बीमार पड़ रहे हैं और तकलीफें झेल रहे हैं, तो वे दंग रह जाएंगे।”