Edited By Sanjeev,Updated: 11 Oct, 2026 12:35 PM

CJP के विरोध प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए आज सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष बैठक हुई। कोर्ट ने कहा कि जब तक "बहुत जरूरी" न हो, तब तक सभी बैरिकेड हटा दिए जाने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि लोगों...
नई दिल्ली : CJP के विरोध प्रदर्शनों की वजह से दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के लिए आज सुप्रीम कोर्ट की एक विशेष बैठक हुई। कोर्ट ने कहा कि जब तक "बहुत जरूरी" न हो, तब तक सभी बैरिकेड हटा दिए जाने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि लोगों की आवाजाही सामान्य होनी चाहिए, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमों का पालन किया जाना चाहिए।
आज की यह टिप्पणी वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा दायर अवमानना याचिका पर आई। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 9 अक्टूबर के उस आदेश का जिक्र किया गया था, जो 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन के दौरान 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद करने और दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने के खिलाफ एक अलग मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया था। जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह भी कहा कि लोगों को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन यह पुलिस एक्ट के दायरे में होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'आपको विरोध करने का अधिकार है, इसमें कोई विवाद नहीं है, लेकिन विरोध करने का तरीका पुलिस एक्ट के दायरे में होना चाहिए।'
जस्टिस बागची ने याचिकाकर्ता से कहा कि वे यह नहीं कह सकते कि उनका विरोध करने का अधिकार पुलिस एक्ट से ऊपर है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) समेत संबंधित अधिकारियों को लोगों की हिरासत और उससे जुड़े हालात पर नोटिस जारी किया। कोर्ट ने मंगलवार तक अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) पेश करने का आदेश दिया।