Edited By Niyati Bhandari,Updated: 06 Oct, 2026 01:31 PM

त्यौहारी सीजन में हवाई सफर अब यात्रियों की जेब पर भारी पड़ने लगा है। 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच प्रमुख घरेलू मार्गों पर एकतरफा औसत किराए में पिछले साल के मुकाबले भारी उछाल आया है। दिल्ली-हैदराबाद मार्ग पर सबसे ज्यादा 68 प्रतिशत, मुंबई-कोलकाता पर 51...
नई दिल्ली (इंट.): त्यौहारी सीजन में हवाई सफर अब यात्रियों की जेब पर भारी पड़ने लगा है। 1 सितंबर से 10 नवंबर के बीच प्रमुख घरेलू मार्गों पर एकतरफा औसत किराए में पिछले साल के मुकाबले भारी उछाल आया है। दिल्ली-हैदराबाद मार्ग पर सबसे ज्यादा 68 प्रतिशत, मुंबई-कोलकाता पर 51 प्रतिशत, दिल्ली-गोवा पर 39 प्रतिशत और मुंबई-बेंगलुरु पर 37 प्रतिशत किराया बढ़ा है। यात्रा के मुताबिक घरेलू हवाई किराए फिलहाल 30-40 प्रतिशत तक ज्यादा हैं और मांग अधिक रहने वाले मार्गों पर रवाना होने की तारीख नजदीक आने पर इनमें 15-20 प्रतिशत की और बढ़ोतरी हो सकती है।
कम उड़ानें, बड़े विमान से सीटों की भरपाई
वैश्विक विमानन विश्लेषण कंपनी ओ.ए.जी. के आंकड़ों के मुताबिक अक्तूबर-दिसंबर तिमाही में घरेलू उड़ानों की निर्धारित संख्या पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 5 प्रतिशत कम है। हालांकि, सीट क्षमता में कमी सिर्फ 1.2 प्रतिशत है। इसका मतलब है कि विमानन कंपनियां कम संख्या में उड़ानें चला रही हैं, लेकिन उनमें बड़े विमानों का इस्तेमाल कर अधिक यात्रियों को बैठा रही हैं।
इस बदलाव से पूरे देश में सीटों की कमी नहीं हुई है, लेकिन यात्रियों के लिए विकल्प जरूर घटे हैं। खासकर त्योहारी सीजन की व्यस्त तारीखों पर किसी खास समय या पसंदीदा उड़ान का विकल्प कम होने से किराया तेजी से बढ़ सकता है।
सबसे व्यस्त दिन 7 दिसंबर
ओ.ए.जी. के मुख्य विश्लेषक जॉन ग्रांट के अनुसार इस तिमाही में घरेलू विमानन क्षमता का सबसे व्यस्त दिन 7 दिसंबर रहने की उम्मीद है। उस दिन करीब 5,89,386 सीटें निर्धारित हैं। पिछले साल के सबसे व्यस्त दिन यह संख्या 6,03,634 थी। ओ.ए.जी. के आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि अलग-अलग मार्गों पर विमानन कंपनियों की रणनीति काफी अलग है। मुंबई-जामनगर मार्ग पर क्षमता पिछले साल के 32,452 से बढ़कर 1,02,520 सीटों से ज्यादा हो गई है। वहीं नई नवी मुंबई हवाईअड्डा सेवा बढ़ने के कारण दिल्ली-नवी मुंबई मार्ग पर क्षमता 8,158 से बढ़कर 1,42,600 सीटों तक पहुंच गई है। इसके उलट अहमदाबाद-कोलकाता मार्ग पर क्षमता 20.9 प्रतिशत और हैदराबाद-जयपुर मार्ग पर 33.1 प्रतिशत घट गई है।