विवाह जैसी पवित्र संस्था को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए: हाईकोर्ट

Edited By Updated: 30 Sep, 2026 12:02 PM

high court marriage ruling

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामूली विवादों के कारण आपसी सहमति से तलाक लेने और बाद में पुनर्विवाह करने वाले एक जोड़े को सुरक्षा प्रदान करते हुए कहा कि विवाह जैसी पवित्र संस्था को हलके में नहीं लिया जाना चाहिए।

लखनऊ (एजैंसी): इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मामूली विवादों के कारण आपसी सहमति से तलाक लेने और बाद में पुनर्विवाह करने वाले एक जोड़े को सुरक्षा प्रदान करते हुए कहा कि विवाह जैसी पवित्र संस्था को हलके में नहीं लिया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि जब दंपति के पहले से ही दो बच्चे हों, ऐसे में आपसी तलाक की दिशा में कदम उठाना और उसके बाद फिर से शादी करना ‘एक दुखद स्थिति’ है। 

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की पीठ ने याचिकाकर्ता रूपा रानी और उनके पति द्वारा दायर एक उस रिट याचिका का निपटारा करते हुए यह टिप्पणी की जिसमें जोड़े ने अपने शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में माता-पिता के हस्तक्षेप से सुरक्षा व विवाह को पंजीकृत कराने में सहायता का अनुरोध किया था। याचिका के अनुसार जोड़े की पहले शादी हुई थी और उनके दो बच्चे हैं।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 


 

Related Story

    Trending Topics

    img title
    img title

    Be on the top of everything happening around the world.

    Try Premium Service.

    Subscribe Now!