UPSC के 100 साल पूरे होने पर होगा खास आयोजन, PM मोदी आज जारी करेंगे विशेष स्मारक सिक्का और डाक टिकट

Edited By Updated: 01 Oct, 2026 05:46 AM

pm modi to attend upsc centenary celebrations

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह में शामिल होंगे। यह आयोजन देश की शीर्ष सिविल सेवा भर्ती संस्था के 100 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।...

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 1 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के शताब्दी समारोह में शामिल होंगे। यह आयोजन देश की शीर्ष सिविल सेवा भर्ती संस्था के 100 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री सुबह 11 बजे समारोह को संबोधित करेंगे और इस दौरान एक विशेष स्मारक सिक्का, डाक टिकट तथा ‘100 लैंडमार्क जजमेंट्स- शेपिंग द पॉलिसीज़ ऑफ़ UPSC एंड पब्लिक सर्विस कमीशन्स इन इंडिया’ नामक पुस्तक का विमोचन करेंगे।

एक साल से चल रहे शताब्दी वर्ष का समापन
यह समारोह UPSC के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित एक साल लंबे कार्यक्रम का औपचारिक समापन करेगा, जिसकी शुरुआत पिछले वर्ष 1 अक्टूबर को हुई थी। 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को आयोजित इस दो दिवसीय समारोह में राज्य लोक सेवा आयोगों के सदस्य, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, शिक्षाविद और आयोग के अधिकारी शिरकत कर रहे हैं। कार्यक्रम के पहले दिन ‘शताब्दी समारोह - मंथन’ का आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध वक्ताओं के संबोधन और लोक सेवा तथा भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं।

1926 में हुई थी स्थापना, सर रॉस बार्कर बने थे पहले अध्यक्ष
UPSC का इतिहास 5 मार्च 1919 को भारतीय संवैधानिक सुधारों पर जारी भारत सरकार के पहले प्रेषण (First Dispatch) से जुड़ा है, जिसने सेवा मामलों को विनियमित करने के लिए एक स्थायी निकाय की आवश्यकता रेखांकित की थी। इसके बाद लॉर्ड ली की अध्यक्षता में गठित 'रॉयल कमीशन ऑन द सुपीरियर सिविल सर्विसेज इन इंडिया' की 1924 की रिपोर्ट ने लोक सेवा आयोग की स्थापना की सिफारिश की। इसके तहत 1 अक्टूबर 1926 को पहले लोक सेवा आयोग की स्थापना की गई, जिसके पहले अध्यक्ष सर रॉस बार्कर बने थे।

संवैधानिक दर्जा और आयोग की मुख्य जिम्मेदारियां
शुरुआत में सीमित सलाहकारी शक्तियों वाले इस निकाय को भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत 'फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन' बनाया गया, जो स्वतंत्रता के बाद UPSC कहलाया। 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही अनुच्छेद 315 के तहत इसे संवैधानिक दर्जा मिला। वर्तमान में आयोग में एक अध्यक्ष और 10 सदस्य शामिल हैं तथा अनुच्छेद 320 के तहत सिविल सेवाओं में भर्ती से जुड़े मामलों पर सरकार को इससे परामर्श लेना अनिवार्य होता है। UPSC अखिल भारतीय सेवाओं तथा केंद्रीय समूह 'क' और समूह 'ख' सेवाओं के लिए परीक्षाओं का संचालन करता है, सीधी भर्ती, पदोन्नति, प्रतिनियुक्ति, भर्ती नियमों के निर्माण व संशोधन तथा अनुशासनिक मामलों पर सरकार को सलाह प्रदान करता है।

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