Edited By Niyati Bhandari,Updated: 19 Jun, 2026 01:54 PM

देश-विदेश में श्रीमद् भगवद् गीता की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार कर रहे गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में भारत से 160 श्रद्धालुओं का जत्था अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में सहभागिता करने जापान के टोक्यो शहर पहुंचा।
टोक्यो (जापान) (राजन सपड़ा) : देश-विदेश में श्रीमद् भगवद् गीता की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार कर रहे गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में भारत से 160 श्रद्धालुओं का जत्था अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में सहभागिता करने जापान के टोक्यो शहर पहुंचा। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड एवं जीओ गीता के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में न केवल भारत अपितु जापान के राजनीतिक, सामाजिक गण्यमान्यों सहित यहां के निवासियों का भी खूब उत्साह देखने को मिला। प्रातःकाल टोक्यो के हनेदा हवाई अड्डे पर पहुंचे सैंकड़ों श्रद्धालुओं संग गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज का जापानवासियों ने भव्य अभिनंदन किया।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल व विजय नरूला ने बताया कि गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के सान्निध्य में 19 से 23 जून तक जापान के टोक्यो, ओसाका व क्योटो में अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन होगा। इसके अंतर्गत जापान के अनेक संसद सदस्यों से मुलाकात के अतिरिक्त अंतर्राष्ट्रीय गीता सैमीनार, योग दिवस पर जापानी दूतावास द्वारा योग कार्यक्रम का आयोजन, गीता यज्ञ, गीता शोभायात्रा और ओसाका में सुबुकी इवैंट एवं ओटानी यूनिवर्सिटी में गीता से संबंधित अनेक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।
हनेदा हवाई अड्डे पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के जापान में आयोजन पर बात करते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के आयोजन का उद्देश्य विश्व के विभिन्न देशों के बीच सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ श्रीमद् भगवद् गीता के उस संदेश का विश्व भर में प्रचार-प्रसार करना है, जो संदेश भौगोलिक एवं सांस्कृतिक सीमाओं से परे मानवता को जोड़ता है।
हाऊस ऑफ काऊंसलर्स के महानिदेशक ने भी ग्रहण की गीता
गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के नेतृत्व में जापान की हाऊस ऑफ काऊंसलर्स के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विभाग महानिदेशक मोरी कोकुदो को हरियाणा सरकार के प्रतिनिधिमंडल द्वारा पवित्र श्रीमद् भगवद् गीता भेंट की गई। गीता को सम्मानपूर्वक स्वीकार करते हुए मोरी कोकुदा ने कहा कि आध्यात्मिक साहित्य विश्व में शांति, सद्भाव, नैतिक मूल्यों और विभिन्न देशों के लोगों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।