Kadve Pravachan Muni Tarun Sagar : लोग क्या कहेंगे, इस सोच से कैसे बाहर निकलें?

Edited By Updated: 30 Apr, 2026 01:00 PM

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फुर्सत कब मिलेगी! आदमी से कहो : भाई! धर्म- ध्यान किया कर तो आदमी कहता है-दिल तो बहुत करता है पर क्या करूं? फुर्सत नहीं मिलती। अरे पगले!

फुर्सत कब मिलेगी!
आदमी से कहो : भाई! धर्म- ध्यान किया कर तो आदमी कहता है-दिल तो बहुत करता है पर क्या करूं? फुर्सत नहीं मिलती। अरे पगले! तो क्या मरने के बाद फुर्सत मिलेगी?
तुझे पता होना चाहिए कि जो समय तू भक्ति के लिए निकाल रहा है, वही अंतिम समय में तेरे काम आएगा। यह तो अच्छा हुआ कि मौत पूछकर नहीं आती, वरना आदमी उससे भी कह दे कि अभी फुर्सत नहीं है।

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उसकी रजा में राजी रहो
जो मिला, जैसा मिला, इसके लिए कोई शिकायत न करें और अगर मनपसंद मिल गया तो गुमान न करें। हर घटना को प्रभु का प्रसाद मानें और उसकी रजा में राजी रहें।
जो जिंदगी के विषाद को भी प्रभु का प्रसाद मानकर चलता है उसके लिए विषाद भी आशीर्वाद बन जाया करता  है।
प्रभु से इस बात की शिकायत न करो कि तुम्हें औरों से कम मिला है, बल्कि इस बात के लिए धन्यवाद दो कि उसने तुम्हें तुम्हारी पात्रता से ज्यादा दिया है।

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दुनिया की चिंता मत करो
किसी ने पूछा, ‘‘आज का सबसे बड़ा रोग?’’
मैंने कहा, ‘‘क्या कहेंगे लोग?’’
लोग क्या कहेंगे यह इस युग की सबसे बड़ी बीमारी है। लोग क्या कहेंगे- यह सोच कर आदमी कुछ नहीं करता। न हंसता है न रोता है।
कुछ करता है, तो भी यही सोचकर कि वरना लोग क्या कहेंगे और तुम्हें पता होना चाहिए कि दुनिया तो यों भी कहेगी और त्यों भी कहेगी। तुम नीचे देख चलोगे तो कहेगी-अब तो किसी के सामने देखता तक नहीं है। ऊपर देख कर चलोगे तो कहेगी-कैसी अकड़ में चलता है। चारों ओर देख कर चलोगे तो कहेंगे इसकी आंखों का कोई ठिकाना नहीं है। बंद करके बैठोगे तो कहेंगे बड़ा ध्यानी बन रहा है बगुला-भगत। अगर अपनी आंखें फोड़ लोगे तो कहेगी- किया है तो भुगतो। दुनिया क्या कहती है- इसकी चिंता मत करो। बढ़े चलो-चले चलो।

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