Edited By Sarita Thapa,Updated: 27 Apr, 2026 01:34 PM

स्वामी विवेकानंद जी से एक जिज्ञासु व्यक्ति ने प्रश्न किया, मां की महिमा संसार में किस कारण से गाई जाती है? स्वामी जी मुस्कुराए, उस व्यक्ति से बोले, पांच सेर वजन का एक पत्थर ले आओ।
Swami Vivekananda Story : स्वामी विवेकानंद जी से एक जिज्ञासु व्यक्ति ने प्रश्न किया, मां की महिमा संसार में किस कारण से गाई जाती है? स्वामी जी मुस्कुराए, उस व्यक्ति से बोले, पांच सेर वजन का एक पत्थर ले आओ। जब व्यक्ति पत्थर ले आया तो स्वामी जी ने उससे कहा, अब इस पत्थर को किसी कपड़े में लपेटकर अपने पेट पर बांध लो और चौबीस घंटे बाद मेरे पास आओ तो मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर दूंगा।
स्वामी जी के आदेशानुसार उस व्यक्ति ने पत्थर को अपने पेट पर बांध लिया और चला गया। पत्थर बंधे हुए दिन भर वह अपना काम करता रहा, किन्तु हर क्षण उसे परेशानी और थकान महसूस हुई। शाम होते-होते पत्थर का बोझ संभाले हुए चलना-फिरना उसके लिए मुश्किल हो उठा। थका-मांदा वह स्वामी जी के पास पहुंचा और बोला मैं इस पत्थर को अब और अधिक देर तक बांधे नहीं रख सकूंगा।
एक प्रश्न का उत्तर पाने के लिए मैं इतनी बड़ी सजा नहीं भुगत सकता। स्वामी जी मुस्कुराते हुए बोले, पेट पर पत्थर का बोझ तुमसे कुछ घंटे भी नहीं उठाया गया। मां अपने गर्भ में पलने वाले शिशु को पूरे नौ माह तक ढोती है और गृहस्थी का सारा काम करती है। संसार में मां के सिवा कोई इतना धैर्यवान और सहनशील नहीं है। इसलिए मां से बढ़ कर इस संसार में कोई और नहीं। यह सुनकर व्यक्ति संतुष्ट हो गया।
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