Kundli Tv- हिंदू धर्म में आखिर क्यों मारते हैं मुर्दे के सिर पर डंडा

Edited By Updated: 29 Sep, 2018 11:14 AM

kapal kriya importance in garudha puran

हर धर्म के अपने-अपने रीति-रिवाज़ होते हैं। एेसे ही हिंदू धर्म के शास्त्रों के मुताबिक जब भी किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उसका अंतिम संस्कार किया जाता है। किसी अन्य धर्म में ये परंपरा नहीं निभाई जाती।

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हर धर्म के अपने-अपने रीति-रिवाज़ होते हैं। एेसे ही हिंदू धर्म के शास्त्रों के मुताबिक जब भी किसी व्यक्ति की मौत होती है तो उसका अंतिम संस्कार किया जाता है। किसी अन्य धर्म में ये परंपरा नहीं निभाई जाती। जैसे मुस्लिम धर्म में मृत व्यक्ति को दफनाया जाता है, वैसे ही हिन्दू धर्म में मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया जाता है। लेकिन आपको इस दौरान होने वाली एक प्रक्रिया के बारे में जानकर बेहद हैरानी होगी। 

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पुराणों और कुछ धार्मिक ग्रथों के अनुसार ऐसा माना जाता है कि मरने के बाद व्यक्ति से जुड़ी ये जो आखिरी प्रक्रिया की जाती है, इसका असर उसके अगले जीवन पर भी पड़ता है। यही कारण है कि इंसान का अंतिम संस्कार करते समय ज्योतिष की हिदायक होती है कि हर काम बड़ी सावधानी के साथ किया जाए, ताकि इस दौरान कोई गलती न हो। बहुत कम लोग जानते होंगे कि अंतिम संस्कार के समय एक महत्वपूर्ण क्रिया निभाई जाती है जिसे कपाल क्रिया कहा जाता है।


आपको बता दें कि हिंदू धर्म में कपाल क्रिया के बिना किसी भी इंसान का अंतिम संस्कार का कार्य पूरा नहीं माना जाता। कहा जता है कि ये क्रिया देखने में इतनी खतरनाक होती है कि देखने वाले का दिल दहल जाता है। एेसे में बहुत से लोग होते हैं जिनके दिल में ये बात उठती है कि आखिर ये कपाल क्रिया करना इतना ज़रूरी क्यों है। गरुड़ पुराण के अनुसार जब भी किसी मुर्दे को मुखाग्नि दी जाती है तो सबसे ज्यादा घी उसके सर पर डाला जाता है। बता दें कि एेसा इसलिए ताकि उसका सर अच्छी तरह से जल जाए। 

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जब सर जल जाता है, तो उस पर डंडा मार कर यानि कि सर पर डंडे से वार करके उसे तोड़ दिया जाता है। श्मशान में होने वाली इस क्रिया को ही कपाल क्रिया कहा जाता है। अब आपके दिमाग में ये सवाल आएगा कि मरने के बाद आखिर क्यों व्यक्ति का सर एेसे तोड़ा-फोड़ा जाता है और इस तरह से उसके सर पर वार क्यों किया जाता है। तो आपकी बता दें कि इसके पीछे भी दो कारण है।

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पहला कारण तो ये है कि अगर सर पर वार करके उसे न तोड़ा जाए, तो कई बार सर अधजला ही रह जाता है यानि वो पूरी तरह नहीं जल पाता। इसलिए उसका अंतिम संस्कार भी संपन्न नहीं माना जाता। 


धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसका दूसरा कारण इंसान को सांसारिक बंधनों से मुक्त करवाकर उसे मोक्ष की प्राप्ति करवाना होता है। इस कपाल क्रिया के बाद ही एक मृत व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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हिंदू धर्म के ग्रथों आदि में कहा गया है कि इन सब बातों का ध्यान ज़रूर रखना चाहिए, क्योंकि जीवन और मृत्यु के बारे में अधूरी जानकारी कभी-कभी इंसान को पाप का भागीदार बना देती है। इसलिए इसकी पूरी प्रक्रिया के बारे में पता होना बेहद ज़रूरी है।
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