Kawad yatra 2026 : कांवड़ यात्रा में कौन से रंग के वस्त्र पहनना माना जाता है मंगलकारी, जानें धार्मिक मान्यता

Edited By Updated: 01 Aug, 2026 11:16 AM

kawad yatra 2026

सनातन धर्म में सावन का महीना देवों के देव महादेव को बहुत ही प्रिय है। सावन के माह में शिव जी की पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए इस माह में शिव जी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए शिव भक्त कई तरह के उपाय करते हैं और उपवास...

Kawad yatra 2026 : सनातन धर्म में सावन का महीना देवों के देव महादेव को बहुत ही प्रिय है। सावन के माह में शिव जी की पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, इसलिए इस माह में शिव जी को प्रसन्न करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए शिव भक्त कई तरह के उपाय करते हैं और उपवास रखते हैं। सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही चारों तरफ शिव जी के जयकारों की गूंज सुनाई  देने लगते हैं। सावन के इस पावन माह में ही लाखों भोलेनाथ के भक्त पवित्र नदियों से जल भरक मीलों पैदल यात्रा करते हैं और महादेव का जलाभिषेक करते हैं। हिंदू धर्म में कावड़ यात्रा का बहुत खास महत्व है। कावड़ यात्रा के दौरान पूरी सड़क एक ही रंग में रंगी हुई नजर आती है। क्या आपने सोचना है कि कावड़ यात्रा के दौरान कौन से रंग के वस्त्र पहनने से शिव जी जल्द प्रसन्न होते हैं और अपनी खास कृपा बरसाते हैं। तो आइए जानते हैं कावड़ यात्रा के दौरान कौन से रंग के कपड़े पहनना मंगलकारी माना जाता है। 

कांवड़ यात्रा के लिए सबसे मंगलकारी रंग
कावड़ यात्रा के दौरान भगवा या केसरिया रंग के वस्त्र पहनना बहुत शुभ और मंगलकारी माना जाता है। शिव जी के ज्यादातर भक्त कावड़ यात्रा के दौरान केसरिया रंग के कपड़े पहने हुए नजर आते हैं। कई जगह पर कावड़ यात्रा के दौरान भक्त सफेद रंग के वस्त्र भी धारण करते हैं, लेकिन भगवा रंग यात्रा के दौरान पहनने से यात्रा का पूरा फल प्राप्त होता है और शिव जी जल्द प्रसन्न होते हैं।   

क्यों पहना जाता है भगवा रंग, जानिए कारण

त्याग, तपस्या और वैराग्य का प्रतीक
सनातन परंपरा में भगवा रंग को साधु-संतों और संन्यासियों का रंग माना गया है। यह रंग सांसारिक मोह-माया से दूरी और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण को दर्शाता है। कांवड़ यात्रा कोई आम यात्रा नहीं, बल्कि एक कठिन साधना है। जब कोई भक्त भगवा वस्त्र धारण करता है, तो वह यह संकल्प लेता है कि यात्रा के दौरान वह एक तपस्वी की तरह रहेगा और अपना पूरा ध्यान सिर्फ शिव भक्ति में लगाएगा।

आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केसरिया या भगवा रंग सूर्य देव और अग्नि से भी संबंधित है। यह रंग व्यक्ति के भीतर छिपे आलस्य को दूर करता है और सकारात्मक ऊर्जा, साहस व आत्मबल को बढ़ाता है। चूंकि कांवड़ यात्रा में कई किलोमीटर तक नंगे पैर चलना पड़ता है, इसलिए यह रंग भक्तों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाए रखने में मदद करता है।

अनुशासन और समानता की भावना
जब लाखों की भीड़ में हर कोई एक ही रंग के कपड़े पहनता है, तो अमीर-गरीब, जाति-पाति का भेद पूरी तरह मिट जाता है। सभी शिवभक्त एक समान नजर आते हैं। यह रंग कांवड़ियों के बीच एकजुटता, भाईचारे और कड़े अनुशासन का प्रतीक है।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
 

Related Story

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!