Edited By Rahul Rana,Updated: 04 Aug, 2026 07:39 PM

बिहार के बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर देशभर में चर्चा हो रही है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वे जनता के जनादेश को स्वीकार करते हैं।
पटना: बिहार के बांकीपुर उपचुनाव के नतीजों पर देशभर में चर्चा हो रही है। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि वे जनता के जनादेश को स्वीकार करते हैं, लेकिन लोगों का गुस्सा भाजपा सरकार, मुख्यमंत्री और उनकी गलत नीतियों के खिलाफ था।
तेजस्वी यादव ने कहा, “हम जनता के जनादेश को स्वीकार करते हैं। हालांकि, जनता का गुस्सा बीजेपी सरकार, मुख्यमंत्री और उनकी गलत नीतियों के खिलाफ था। 100 से 150 दिनों के अंदर, सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बीजेपी MLC और MLA, दोनों चुनाव हार गई। इतने कम समय में दो बड़े चुनाव हारना यह दिखाता है कि सम्राट चौधरी पूरी तरह से नाकाम रहे हैं। लोगों का उन पर और बीजेपी सरकार पर से भरोसा उठ गया है...”
बांकीपुर नतीजों से जुड़ी चर्चा
बांकीपुर भाजपा अध्यक्ष बन चुके नितिन नवीन की सीट थी, जो उनके राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई थी। लगभग तीन दशकों से यहां से भाजपा जीतती आ रही थी। इस बार की हार ने बीजेपी नेतृत्व को समीक्षा के लिए मजबूर कर दिया है। यह चुनाव ऐसे समय में हुआ जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद छोड़ चुके हैं। इसलिए विपक्षी दल बीजेपी पर लगातार हमलावर है।
बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे
बांकीपुर सीट पर कुल 25 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जिनमें आठ निर्दलीय शामिल थे। जन सुराज के प्रत्याशी प्रशांत किशोर ने अपने पहले ही चुनाव में भाजपा उम्मीदवार नीरज कुमार को 19,324 वोटों से हराकर जीत हासिल की। उन्हें 64,151 वोट मिले। भाजपा ने नीरज कुमार को अंतिम समय में उम्मीदवार बनाया था, क्योंकि पार्टी के घोषित प्रत्याशी अभिषेक ‘बंटी’ ने पारिवारिक कारणों का हवाला देते हुए चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की रेखा गुप्ता को 14,273 वोट मिले। इससे पहले 2025 के विधानसभा चुनाव में भी वे नितिन नवीन से 50 हजार से अधिक वोटों के अंतर से पराजित हुई थीं। करीब 3.8 लाख मतदाताओं वाले इस विधानसभा क्षेत्र में 30 जुलाई को मतदान हुआ था। इस बार 34.30 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 2025 के विधानसभा चुनाव में हुए 41.45 प्रतिशत मतदान की तुलना में काफी कम रहा। राजनीतिक विश्लेषक और बांकीपुर के नतीजों को बिहार की सियासत में संभावित बदलावों से जोड़कर देख रहे हैं।