भगवान विश्वकर्मा की 4 अद्भुत रचनाएं, सोने की लंका से द्वारका तक जानें पूरी कहानी

Edited By Updated: 24 Sep, 2026 11:55 AM

अगर कोई आपसे पूछे कि दुनिया के सबसे बड़े और अद्भुत वास्तुकार कौन थे, तो शायद जवाब सोचने में थोड़ा वक्त लगे, लेकिन हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में एक ऐसे दिव्य शिल्पकार का वर्णन मिलता है, जिनकी बनाई रचनाओं की कल्पना आज भी लोगों को हैरान कर देती है।

Lord Vishwakarma Creations : अगर कोई आपसे पूछे कि दुनिया के सबसे बड़े और अद्भुत वास्तुकार कौन थे, तो शायद जवाब सोचने में थोड़ा वक्त लगे, लेकिन हिंदू धर्म की पौराणिक कथाओं में एक ऐसे दिव्य शिल्पकार का वर्णन मिलता है, जिनकी बनाई रचनाओं की कल्पना आज भी लोगों को हैरान कर देती है। हम बात कर रहे हैं भगवान विश्वकर्मा की। विश्वकर्मा जी जिन्हें देवताओ के लिए महलों के निर्माणों, दिव्य हथियारों और वाहनों के मुख्य निर्माता माना जाता है। लेकिन कहा जाता है कि भगवान विश्वकर्मा ने सिर्फ देवताओं के लिए महल और अस्त्र-शस्त्र ही नहीं बनाए, बल्कि ऐसे भव्य नगर भी बसाए, जिनका वर्णन पुराणों और धार्मिक कथाओं में मिलता है। सोने की लंका से लेकर भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका तक, आखिर कौन-कौन से नगर भगवान विश्वकर्मा के द्वारा बनाए गए और इनमें ऐसा क्या था जो आज भी इन नगरों और महलों का जिक्र आज भी पौराणिक कथाओं में मिलता है। तो जानते हैं ऐसे ही  4 महलों और नगरों  के बारे में जिनकी दिव्यता की चर्चा आज भी की जाती है। 

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सोने की लंका 
धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं में सोने की लंका के बारे में बताया गया है और शायद ही ऐसा कोई हो जिसने कभी रावण की सोने की लंका के बारे में न सुना हो। कथाओं के अनुसार रावण की सोने की लंका को बहुत ही भव्य और अद्भुत माना गया है। लेकिन मान्यताओं के अनुसार इस दिव्य और भव्य सोने की लंका के निर्माण के पीछे स्वयं भगवान विश्वकर्मा जी का दिव्य कौशल माना जाता है। इससे जुड़ी इस पौराणिक कथा का वर्णन भी मिलता है जिसके अनुसार एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से महल में रहने की इच्छा जताई। माता पार्वती की इच्छा को पूरा करते हुए भगवान शिव ने विश्वकर्मा जी से एक सोने का महल तैयार करवाया। कथा के अनुसार जब महल बनकर तैयार हुआ, तब गृह प्रवेश की पूजा के लिए विद्वानों और ब्राह्मणों को बुलाया गया, जिसमें रावण को भी न्योता दिया गया। पूजा पूरी होने के बाद जब रावण को दक्षिणा मांगने के लिए कहा गया तो रावण ने दक्षिणा में मोहवश सोने का महल मांग लिया। भगवान शिव ने बिना संकोच के रावण को सोने का महल दान कर दिया। इससे जुड़ी एक और कथा का वर्णन मिलता है जिसके अनुसार सोने की लंका का आधिपत्य रावण के सौतेले भाई भगवान कुबेर के पास था और रावण ने शक्ति के पराक्रम से लंका को बलपूर्वक छीन लिया था। सोने से सजी इस लंका की भव्यता और उसकी वास्तुकला इतनी विलक्षण बताई जाती है कि आज भी इसकी कल्पना लोगों को रोमांचित करती है। यही वजह है कि लंका का नाम भगवान विश्वकर्मा की अद्भुत शिल्पकला से जुड़ी सबसे चर्चित पौराणिक रचनाओं में लिया जाता है।

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देवराज इंद्र की राजधानी अमरावती 
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवराज इंद्र की राजधानी अमरावती को स्वर्ग लोग की सबसे भव्य नगरियों में गिना गया है। कहा जाता है कि इंद्रपुरी का निर्माण भी भगवान विश्वकर्मा जी के द्वारा ही किया गया था। यहां मौजूद राजमहल, भव्य भवन और देवताओं के लिए बनाई गई दूसरी संरचनाएं उनकी अनुपम वास्तुकला को दर्शाती थीं।धार्मिक कथाओं में अमरावती की ऐसी अद्भुत व्यवस्था का वर्णन मिलता है, जिसे सामान्य मनुष्य की कल्पना से परे माना गया है। यही कारण है कि इंद्रपुरी का नाम भगवान विश्वकर्मा की प्रसिद्ध रचनाओं में लिया जाता है।

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द्वारका नगरी 
भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी जिसे आज भी बहुत रहस्यमयी माना जाता है, स्वयं भगवान विश्वकर्मा जी के द्वारा ही बनाई गई मानी जाती है। कहा जाता है कि कंस के वध के बाद कंस का ससुर जरासंध बार-बार मथुरा पर आक्रमण करता था लेकिन हर बार परास्त हो जाता है। मान्यताएं कहती है कि जरासंध ने यदुवंशियों पर एक बार या दो बार नहीं बल्कि 17 बार आक्रमण किया था। ऐसे में लोगों में भी डर बैठ चुका था और मथुरा वासियों की सुरक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने समुद्र के बीचों बीच एक ऐसी नगरी का निर्माण करवाया जिस तक शत्रु आसानी से न पहुंच सकें। कहते हैं कि द्वारका नगरी बेहद ही भव्य और शानदार थी जो भगवान विश्वकर्मा की अद्भुत वास्तुकला का नमूना मानी जाती है।

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इंद्रप्रस्थ 
महाभारत के प्रसंगों में इंद्रप्रस्थ का उल्लेख एक ऐसी दिव्य और भव्य नगरी के रूप में मिलता है, जिसे पांडवों के लिए बसाया गया था। कहा जाता है कि इसका निर्माण भी विश्वकर्मा जी ने ही किया था। मान्यताओं के अनुसार, इस पूरी नगरी की सबसे चौंकाने वाली और विशेष बात थी यहां कि मायासभा, जिसे मायासुर के द्वारा बनाया गया था। इसे वास्तु और भ्रम का ऐसा अनोखा संयोजन दिखाई देता था कि व्यक्ति के लिए वास्तविकता और भ्रम में अंतर करना कठिन हो जाता था।

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