Edited By Sarita Thapa,Updated: 03 Apr, 2026 01:04 PM

गर्मी की शुरुआत के साथ ही विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल को शीतलता प्रदान करने की प्राचीन परंपरा शुरू हो गई है।
Mahakal Temple Summer Tradition : गर्मी की शुरुआत के साथ ही विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल को शीतलता प्रदान करने की प्राचीन परंपरा शुरू हो गई है। शुक्रवार से बाबा महाकाल पर सतत जलधारा अर्पित करने का क्रम विधिवत प्रारंभ हो चुका है, जो 29 जून यानी ज्येष्ठ पूर्णिमा तक निरंतर जारी रहेगा।
मंदिर परंपरा के अनुसार प्रतिदिन भस्म आरती के बाद सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया जाएगा। इस दौरान 11 मिट्टी के कलशों के माध्यम से निरंतर जलधारा प्रवाहित की जा रही है। इन कलशों में गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी, सरयू और क्षिप्रा सहित देश की प्रमुख पवित्र नदियों का मंत्रोच्चार के साथ आव्हान कर जल स्थापित किया जाता है।
विशेष बात यह है कि रजत अभिषेक पात्र के साथ ‘गलंतिका’ बांधकर यह जलधारा चढ़ाई जाती है, जो मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। मान्यता है कि भीषण गर्मी के दौरान इस अनुष्ठान से भगवान महाकाल को शीतलता प्रदान की जाती हैं। पुजारियों के अनुसार इस वर्ष अधिक मास होने के कारण जलधारा अर्पण की अवधि बढ़ा दी गई है, जिससे यह अनुष्ठान और अधिक समय तक चलेगा।
(विशाल ठाकुर)
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