Edited By Sarita Thapa,Updated: 12 Sep, 2026 08:31 AM

सनातन धर्म परिवर्तिनी एकादशी का बहुत खास महत्व है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पद्मा एकादशी, जलझूलनी एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।
Parivartini Ekadashi 2026 : सनातन धर्म परिवर्तिनी एकादशी का बहुत खास महत्व है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पद्मा एकादशी, जलझूलनी एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। माना जाता है कि इस दिन सच्चे मन से विष्णु जी की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन में आने वाली सारी परेशानियों से छुटकारा मिलता है और पापों का नास होता है। कहा जाता है कि देवशयनी एकादशी से चातुर्मास के दौरान क्षीरसागर में योगनिद्रा में लीन भगवान श्री हरि विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं। इसी कारण इसे परिवर्तिनी एकादशी नाम दिया गया है। तो आइए जानते हैं कि परिवर्तिनी एकादशी के शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में-
परिवर्तिनी एकादशी का शुभ मुहूर्त
भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी या जलझूलनी एकादशी कहा जाता है। परिवर्तिनी एकादशी की शुरुआत 21 सितंबर को रात 8.00 बजे से होगी और इसका समापन 22 सितंबर को रात 09 बजकर 43 मिनट पर होगा। परिवर्तिनी एकादशी का पारण 23 सितंबर को सुबह 6 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 35 मिनट तक कर सकते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, चार महीने की योगनिद्रा के दौरान भगवान विष्णु इस दिन अपनी करवट बदलते हैं। इस दिन वामन अवतार की पूजा करने का विशेष विधान है।
परिवर्तिनी एकादशी का धार्मिक महत्व
इस तिथि पर भगवान विष्णु के पांचवें अवतार 'श्री वामन देव' की पूजा करने का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति सच्चे मन से परिवर्तिनी एकादशी का व्रत रखता है, उसके जाने-अनजाने में हुए सभी पाप और कष्ट दूर हो जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ धन की देवी माता लक्ष्मी की आराधना करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
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