Edited By Sarita Thapa,Updated: 02 Sep, 2026 11:45 AM

रांधण छठ का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि को रांधण छठ मनाई जाती है। यह त्योहार मुख्य रूप से गुजरात में शीतला सातम या शीतला सप्तमी से ठीक एक दिन पहली मनाया जाता है।
Randhan Chhath 2026 : रांधण छठ का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की छठी तिथि को रांधण छठ मनाई जाती है। यह त्योहार मुख्य रूप से गुजरात में शीतला सातम या शीतला सप्तमी से ठीक एक दिन पहली मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य नियम यह है कि घर में अगले दिन यानी शीतला सप्तमी के लिए सारा भोजन रांधण छठ के दिन बना लिया जाता है, क्योंकि सप्तमी के दिन चूल्हा जलाना पूरी तरह से वर्जित होता है। माना जाता है कि इस दिन शीतला माता की पूजा करने से परिवार को रोग और मौसमी बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। तो आइए रांधण छठ के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में-
कब है रांधण 2026 छठ
पंचांग के अनुसार, षष्ठी तिथि की शुरुआत 2 सितंबर को सुबह 6 बजकर 12 मिनट से शुरू होगी और इसका समापन 3 सितंबर को सुबह 4 बजकर 25 मिनट तक होगा। इस साल रांधण छठ बुधवार, 2 सितंबर यानी आज मनाई जाएगी।
रांधण छठ 2026 शुभ मुहूर्त
रांधण छठ पर ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 4 बजकर 29 मिनट से 5 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।
प्रातः सन्ध्या का समय सुबह 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 59 मिनट तक है।
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।
विजय मुहूर्त- दोपहर 2 बजकर 28 मिनट से 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 6 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 5 मिनट तक रहेगा।
सायाह्न सन्ध्या शाम 6 बजकर 43 मिनट से 7 बजकर 50 मिनट तक रहेगी।
अमृत काल- शाम 7 बजकर 42 मिनट से रात 9 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
रांधण छठ पूजा विधि
रांधण छठ के दिन महलिएं सुबह से ही अगले दिन के लिए तरह-तरह के व्यंजन, जैसे थपला, पूरी, शाक, मिठाई और नमकीन तयार कर लेती है।
शाम को पूरा खाना बन जाने के बाद रसोई घर और चूल्हे को अच्छी तरह साफ किया जाता है।
साफ किए गए चूल्हे पर रोली, हल्दी और अक्षत लगाकर पूजा की जाती है।
पूजा के बाद चूल्हे में जल छिड़ककर उसे शांत कर दिया जाता है। इसके बाद अगले 24 घंटे घर में आग या चूल्हा नहीं जलाया जाता।
शीतला सातम के दिन सुबह स्नान करके बासी भोजन से माँ शीतला की पूजा की जाती है और प्रसाद के रूप में ठंडा भोजन ही स्वीकार किया जाता है।
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