Edited By Sarita Thapa,Updated: 11 Sep, 2026 08:00 AM

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर, 2026 को रखा जाएगा।
Hartalika Teej 2026 Rules : भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज का पावन पर्व मनाया जाता है। इस साल हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर, 2026 को रखा जाएगा। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है, जिसमें वे अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य के लिए भगवान शिव और माता पार्वती कू पूजा करती हैं। कुंवारी लड़कियां भी मनचाहा वर पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। यदि आप पहली बार हरतालिका तीज का निर्जला व्रत उठाने जा रही हैं, तो इससे जुड़े नियमों को सही ढंग से जानना आवश्यक है।
हरतालिका तीज के मुख्य नियम
यह व्रत बेहद कठिन माना जाता है। इसमें सूर्योदय से लेकर अगले दिन के सूर्योदय तक बिना जल और अन्न ग्रहण किए रहा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि आपने एक बार हरतालिका तीज का व्रत रखना शुरू कर दिया, तो इसे हर साल नियमपूर्वक रखना होता है। इसे बीच में छोड़ा नहीं जाता।
इस दिन महिलाओं को सर से पांव तक 16 श्रृंगार करके ही पूजा में बैठना चाहिए। पूजा के दौरान माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है।
इस व्रत में रात को सोना वर्जित माना गया है। पूरी रात शिव-पार्वती के भजन-कीर्तन और मंत्रों का जाप करते हुए जागरण करने का विधान है।

पूजा विधि और ध्यान रखने योग्य बातें
पूजा के लिए रेत या काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की प्रतिमाएं हाथों से बनाई जाती हैं।
शाम के समय प्रदोष काल में शुभ मुहूर्त देखकर हरतालिका तीज की व्रत कथा अवश्य सुननी या पढ़नी चाहिए। कथा के बिना व्रत अधूरा माना जाता है।
अगले दिन सुबह अंतिम पूजा और आरती के बाद जल ग्रहण करके ही व्रत खोला जाता है। पारणा से पहले किसी ब्राह्मणी या बुजुर्ग महिला को सुहाग की वस्तुएं दान करें।

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