Edited By Sarita Thapa,Updated: 24 Sep, 2026 11:30 AM

कभी-कभी जीवन में सब कुछ ठीक होते हुए भी ऐसा लगता है जैसे मेहनत का पूरा फल नहीं मिल रहा, घर में बार-बार परेशानियां आ रही हैं या बनते-बनते काम अचानक रुक जाते हैं तो धार्मिक मान्यताओं में ऐसी परिस्थितियों को कई बार पितरों से जुड़े कर्मों और पितृ दोष से...
Pitru Paksha Upay : कभी-कभी जीवन में सब कुछ ठीक होते हुए भी ऐसा लगता है जैसे मेहनत का पूरा फल नहीं मिल रहा, घर में बार-बार परेशानियां आ रही हैं या बनते-बनते काम अचानक रुक जाते हैं तो धार्मिक मान्यताओं में ऐसी परिस्थितियों को कई बार पितरों से जुड़े कर्मों और पितृ दोष से भी जोड़कर देखा जाता है। यही वजह है कि पितृ पक्ष का समय केवल श्राद्ध और तर्पण के लिए ही नहीं, बल्कि पितरों के सम्मान और उनके निमित्त किए जाने वाले छोटे-छोटे धार्मिक कार्यों के लिए भी खास माना जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस पूरे पक्ष में रोजाना किए जाने वाले कुछ आसान काम भी बताए गए हैं, जिन्हें करने की परंपरा पितृ शांति और परिवार की सुख-समृद्धि से जोड़ी जाती है। तो आइए जानते हैं कि ऐसे ही कामों के बारे में जिन्हें पितृ पक्ष के दौरान हर दिन करने से घर-परिवार में खुशहाली और सकारात्मकता बनी रहती है।
गाय की सेवा
हिंदू धर्म में गाय को माता का दर्जा दिया गया है। कहा जाता है कि पितृ पक्ष में गाय की सेवा करना बेहद ही शुभ माना जाता है। ऐसे में पितृ पक्ष के दौरान रोज़ गाय को चारा खिलाएं या रोटी खिलाएं। हो सके तो कोशिश करें कि घर की पहली रोटी रोज़ाना गाय को ही खिलाएं। कहा जाता है कि ऐसा करने वाले जातकों को श्राद्ध कर्म का पूरा फल मिलता है और पितर भी तृप्त होते हैं।
पितरों के नाम का एक दीपक जलाएं
पितृ पक्ष के दौरान रोज़ाना शाम के समय पितरों के नाम का एक दीपक घर की दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके जलाए। ऐसा करना अच्छा माना जाता है। दरअसल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा भी माना जाता है। कहते हैं कि इस पितृ पक्ष के दौरान पितृ धरती पर दक्षिण दिशा से ही आते हैं। ऐसे में कहा जाता है कि अगर इस दिशा में दीपक जलाएं तो इससे पितर प्रसन्न होते हैं साथ ही घर में सुख-शांति आती है।

पितृ पक्ष के दौरान हर रोज़ तर्पण करें
माना जाता है कि पितृ पक्ष के दौरान हर रोज़ तर्पण करना चाहिए। ऐसा करना शुभ माना जाता है। हालांकि, जिन लोगों के माता-पिता जीवित हैं, उनके लिए पितरों का तर्पण करने की परंपरा नहीं मानी जाती। ऐसे लोग प्रतिदिन सुबह अपने पितरों और इष्टदेव का स्मरण करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित कर सकते हैं। वहीं जिनके माता-पिता में से किसी एक का या दोनों का देहांत हो चुका है, उनके लिए पितृ पक्ष में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तर्पण करने की परंपरा बताई जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, तर्पण के जल में दूध और तिल मिलाकर अर्पित करना भी शुभ माना जाता है।

घर की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
पितृ पक्ष के दौरान घर की स्वच्छता का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। मान्यता है कि रोजाना घर की अच्छी तरह सफाई करने के बाद मुख्य द्वार को भी साफ करें और वहां गंगाजल का छिड़काव करें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है और नकारात्मकता दूर करने में मदद मिलती है। इसी तरह, स्नान करते समय पानी में थोड़ी मात्रा में गंगाजल मिलाने की परंपरा भी बताई जाती है।
पितरों का स्मरण करते हुए मंत्रों का जाप
पितृ पक्ष में प्रतिदिन सुबह स्नान के बाद और रात को सोने से पहले पितरों का स्मरण करते हुए मंत्र जाप किया जा सकता है। मंत्र है ॐ पितृगणाय विद्महे जगत् धारिणी धीमहि तन्नो पितृ प्रचोदयात्। ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च। नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः॥ धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा से किए गए मंत्र जाप से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होने और पितृ दोष से राहत की कामना की जाती है।

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