Edited By Sarita Thapa,Updated: 11 Sep, 2026 09:02 AM

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत खास धार्मिक और अध्यात्मिकमहत्व है। भाद्रपद की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके निमित्त तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध कर्म करते हैं।
Sarva Pitru Amavasya 2026 : हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का बहुत खास धार्मिक और अध्यात्मिकमहत्व है। भाद्रपद की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन माह की अमावस्या तक चलने वाले इन 16 दिनों में लोग अपने पूर्वजों को याद करते हैं, उनके निमित्त तर्पण, पिंड दान और श्राद्ध कर्म करते हैं। पितृ पक्ष का अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या कहलाता है, जो संपूर्ण श्राद्ध काल का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। तो आइए जानते हैं सर्व पितृ अमावस्या तिथि के बारे में-
सर्व पितृ अमावस्या तिथि
सर्व पितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026 को है। अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर रात 9 बजकर 35 मिनट से शुरू होकर 10 अक्टूबर रात 9 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि और सूर्योदय के समय अमावस्या 10 सितंबर को पड़ रही है, इसलिए सर्वपितृ अमावस्या का श्राद्ध 10 सितंबर को ही किया जाएगा।
सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
यदि आप किसी कारणवश अपने पूर्वजों की मृत्यु की सही तिथि भूल गए हैं या पूरे पितृ पक्ष में श्राद्ध नहीं कर पाए हैं, तो सर्वपितृ अमावस्या के दिन उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के नाम का श्राद्ध किया जा सकता है। इस दिन तर्पण और दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं, जिससे जीवन में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और घर-परिवार में सुख-शांति आती है। जिन पूर्वजों की मृत्यु तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध भी केवल इसी अमावस्या तिथि पर करने का विधान है।
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