Edited By Sarita Thapa,Updated: 06 Sep, 2026 12:42 PM

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना गया है। यह 16 दिनों की वह पावन अवधि मानी जाती है, जब लोग अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करते हैं। पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया जाता है।
Pitru Paksha 2026 : हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व माना गया है। यह 16 दिनों की वह पावन अवधि मानी जाती है, जब लोग अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता प्रकट करते हैं। पितृ पक्ष में पूर्वजों का श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथी ही पितर प्रसन्न होकर अपने वंश को सुख-समृद्धि और दीर्घायु का आशीर्वाद देते हैं। तो आइए जानते हैं पितृ पक्ष के आरंभ से लेकर सर्व पितृ अमावस्या के साथ समाप्त होने की पूरी तिथि के बारे में-
पितृ पक्ष प्रारंभ 2026 डेट
पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि का आरंभ 26 सितंबर को रात में 10 बजकर 18 मिनट पर होगा। प्रतिपदा तिथि का समापन 27 सितंबर को रात 8 बजकर 58 मिनट पर होगा। उदयातिथि के अनुसार, पितृ पक्ष का प्रारंभ 27 सितंबर 2026 से होगा।
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तिथि का नाम |
दिनांक (2026) |
दिन |
| पूर्णिमा |
पूर्णिमा श्राद्ध |
26 सितंबर |
शनिवार |
| प्रतिपदा |
प्रतिपदा श्राद्ध (नाना-नानी श्राद्ध) |
27 सितंबर |
रविवार |
| द्वितीया |
द्वितीया श्राद्ध |
28 सितंबर |
सोमवार |
| तृतीया |
तृतीया श्राद्ध |
29 सितंबर |
मंगलवार |
| चतुर्थी |
चतुर्थी श्राद्ध |
30 सितंबर |
बुधवार |
| पंचमी |
पंचमी / कुंआरा श्राद्ध |
30 सितंबर |
बुधवार |
| षष्ठी |
षष्ठी श्राद्ध |
1 अक्टूबर |
गुरुवार |
| सप्तमी |
सप्तमी श्राद्ध |
2 अक्टूबर |
शुक्रवार |
| अष्टमी |
अष्टमी श्राद्ध |
3 अक्टूबर |
शनिवार |
| नवमी |
मातृ नवमी (माता और सुहागिनों का श्राद्ध) |
4 अक्टूबर |
रविवार |
| दशमी |
दशमी श्राद्ध |
5 अक्टूबर |
सोमवार |
| एकादशी |
इंदिरा एकादशी श्राद्ध |
6 अक्टूबर |
मंगलवार |
| द्वादशी |
संन्यासी श्राद्ध |
7 अक्टूबर |
बुधवार |
| त्रयोदशी |
त्रयोदशी श्राद्ध |
8 अक्टूबर |
गुरुवार |
| चतुर्दशी |
अकाल मृत्यु श्राद्ध |
9 अक्टूबर |
शुक्रवार |
| अमावस्या |
सर्व पितृ अमावस्या |
10 अक्टूबर |
शनिवार |
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