Edited By Niyati Bhandari,Updated: 24 Aug, 2026 11:23 AM

Sawan Shivling Puja Rules: सावन में शिवलिंग पूजा के दौरान किस दिशा में बैठना चाहिए? जानें पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण दिशा से जुड़े वे नियम जो शीघ्र फल देते हैं।
Sawan 4th Somwar Shivling Puja Direction: सावन के पावन महीने में महादेव की भक्ति का माहौल चारों ओर देखने को मिलता है। हर भक्त शिवलिंग पर जल और बेलपत्र चढ़ाकर शिव जी को प्रसन्न करना चाहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी श्रद्धा और आस्था के साथ-साथ पूजा के नियम और आपके बैठने की दिशा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है? शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग की पूजा के दौरान गलत दिशा में बैठने से पूजा का पूर्ण फल नहीं मिल पाता है। आइए जानते हैं कि सावन के आखिरी सोमवार को शिवलिंग के पास बैठने की वह कौन सी एक सही दिशा है, जो आपके जीवन और मन के सारे कलह मिटाकर हर सुख और मनोकामना पूरी कर सकती है।
उत्तरमुखी होकर करें शिवलिंग पूजन
सावन में शिवलिंग पूजा जीवन व मन से सारे कलह मिटाकर हर सुख देने वाली मानी गई है। हर देव पूजा के समान शिवलिंग पूजा में भी श्रद्धा और आस्था की अहमियत है। इसके साथ ही शास्त्रोक्त नियम व संयम के मुताबिक शिवलिंग पूजा जल्द शुभ फल देने वाली मानी गई है।
इन नियमों में एक है शिवलिंग पूजा के समय भक्त के बैठने की दिशा। शिवलिंग से पूर्व दिशा की ओर नहीं बैठना चाहिए क्योंकि यह दिशा भगवान शिव के आगे या सामने होती है और धार्मिक दृष्टि से देव मूर्ति या प्रतिमा का सामना या रोक ठीक नहीं मानी गई है।

पूजा के दौरान शिवलिंग से पश्चिम दिशा की ओर नहीं बैठना चाहिए क्योंकि वह भगवान शंकर की पीठ मानी जाती है इसलिए पीछे से देवपूजा करना शुभ फल नहीं देती। शिवलिंग से उत्तर दिशा में भी न बैठें क्योंकि माना जाता है कि इस दिशा में भगवान शंकर का बायां अंग होता है, जो शक्तिरूपा देवी उमा का स्थान है।
इस तरह एक दिशा बचती है - वह है दक्षिण दिशा। इस दिशा में बैठकर पूजा फल और इच्छापूर्ति की दृष्टि से श्रेष्ठ मानी जाती है। सरल अर्थ में शिवलिंग के दक्षिण दिशा की ओर बैठकर यानी उत्तर दिशा की ओर मुख कर पूजा और अभिषेक शीघ्र फल देने वाला माना गया है।
